28 September 2026

सर्व पितृ अमावस्या 2026: किस दिन समाप्त होगा श्राद्ध पक्ष, जानें तिथि, पूजा विधि और दान का महत्व

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सनातन धर्म में पितृ पक्ष को श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता का पावन काल माना गया है। यह वह विशेष समय है, जब मनुष्य अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करता है और उनके निमित्त तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान तथा दान-पुण्य करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में श्रद्धापूर्वक किए गए कर्मों से पितरों की तृप्ति होती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है।

पितृ पक्ष की अंतिम तिथि को सर्व पितृ अमावस्या कहा जाता है। यह अमावस्या उन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के स्मरण के लिए विशेष मानी जाती है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात न हो अथवा किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर उनका श्राद्ध न हो पाया हो। इसलिए इस दिन समस्त पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान करने की परंपरा है।

 

सर्व पितृ अमावस्या 2026 कब है?

वर्ष 2026 में सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे से प्रारंभ होकर 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार 10 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या का श्राद्ध किया जाएगा।

इस दिन प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और श्रद्धापूर्वक अपने पितरों का स्मरण करें। अपनी कुल परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार तर्पण, श्राद्ध तथा अन्य धार्मिक कर्म करें और पितरों की शांति एवं सद्गति के लिए भगवान से प्रार्थना करें।

 

सर्व पितृ अमावस्या का धार्मिक महत्व

सर्व पितृ अमावस्या पितृ पक्ष की पूर्णता का पावन दिवस है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान का विशेष महत्व होता है। जिन पितरों की श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं है, उनके निमित्त भी इस दिन श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म किया जा सकता है।

‘श्राद्ध’ शब्द ही श्रद्धा से जुड़ा हुआ है। इसलिए पितरों के निमित्त किए जाने वाले प्रत्येक कर्म में बाहरी आडंबर से अधिक मन की श्रद्धा, भक्ति और कृतज्ञता को महत्व दिया जाता है। अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त करना सनातन परंपरा की महत्वपूर्ण विशेषता है। पितृ पक्ष हमें यह भी स्मरण कराता है कि हमारा वर्तमान हमारे पूर्वजों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने परिवार, संस्कार और परंपराओं को आगे बढ़ाया। इसलिए सर्व पितृ अमावस्या पर उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करना और उनके निमित्त पुण्य कर्म करना हमारी धार्मिक एवं पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है।

 

सर्व पितृ अमावस्या पर क्या करें?

सर्व पितृ अमावस्या के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शांत मन से अपने पितरों का स्मरण करें। कुल परंपरा के अनुसार तर्पण, श्राद्ध अथवा पिंडदान करें। पितरों के निमित्त भोजन तैयार करके श्रद्धापूर्वक अर्पित करें तथा ब्राह्मणों एवं जरूरतमंदों को भोजन कराएं।

अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल, तिल, गुड़ आदि का दान करें। गाय को हरा चारा खिलाना और दीपदान करना भी इस दिन किए जाने वाले पुण्य कर्मों में माना जाता है।

इसके साथ ही श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, श्रीहरि का नाम-स्मरण अथवा रुद्र पाठ करते हुए अपने पितरों की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना करें। इस दिन किए जाने वाले प्रत्येक कर्म में श्रद्धा, सेवा और परोपकार का भाव रखना चाहिए।

 

पितरों के निमित्त अर्पित किए जाने वाले अन्न के महत्व को गरुड़ पुराण में इस प्रकार बताया गया है-

यदाहारा भवन्त्येते पितरो यत्र योनिषु।

तासु तासु तदाहारः श्राद्धान्नेनोपतिष्ठति॥

—गरुड़ पुराण, प्रेतकल्प, अध्याय 225, श्लोक 19

अर्थ: पितर जिस-जिस योनि में स्थित होते हैं, उसी के अनुरूप श्राद्ध में अर्पित अन्न उन्हें प्राप्त होता है।

इस शास्त्रीय भाव के अनुसार पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक अन्न अर्पित करना श्राद्ध कर्म का महत्वपूर्ण अंग माना गया है।

 

सर्व पितृ अमावस्या पर दान का महत्व

सनातन धर्म में दान को त्याग, करुणा और परोपकार का श्रेष्ठ माध्यम माना गया है। दान केवल किसी वस्तु का त्याग नहीं, बल्कि अपने सामर्थ्य में से किसी जरूरतमंद के जीवन में सहयोग और प्रसन्नता पहुंचाने का भाव है।

पितृ पक्ष में किया गया दान पितरों के निमित्त श्रद्धा अर्पित करने का एक माध्यम माना जाता है। गरुड़ पुराण में श्राद्ध और दान के संबंध में पितरों की तृप्ति का उल्लेख मिलता है। ग्रंथ में कहा गया है कि श्रद्धापूर्वक बंधु-बांधवों द्वारा पितरों के निमित्त दिया गया अन्न, धन आदि पितरों को प्राप्त होता है और अन्न, जल तथा शाक आदि के माध्यम से यथासामर्थ्य किया गया श्राद्ध पितरों की तृप्ति के लिए होता है।

इसलिए सर्व पितृ अमावस्या पर किया गया दान केवल सांसारिक आवश्यकता की पूर्ति का माध्यम नहीं, बल्कि पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का भी अवसर है। दान करते समय मन में अहंकार नहीं होना चाहिए। दान का उद्देश्य स्वयं को बड़ा दिखाना नहीं, बल्कि ईश्वर द्वारा दी गई सामर्थ्य को किसी जरूरतमंद की सेवा में समर्पित करना होना चाहिए। सच्चे दान में श्रद्धा, विनम्रता, करुणा और सेवा का भाव होना आवश्यक है।

 

सर्व पितृ अमावस्या पर किन चीजों का दान करें?

सर्व पितृ अमावस्या के पावन अवसर पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, भोजन, वस्त्र, फल, तिल, गुड़, चावल, गेहूं और घी आदि का दान किया जा सकता है। जरूरतमंदों को भोजन कराना और उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति में सहयोग करना भी पुण्यकारी सेवा मानी जाती है।

इन सभी में अन्नदान और भोजन सेवा का विशेष भाव है। किसी भूखे और जरूरतमंद व्यक्ति को श्रद्धापूर्वक भोजन कराना मानव सेवा का ऐसा पुण्य कार्य है, जिसमें करुणा, परोपकार और सेवा की भावना एक साथ समाहित होती है।

 

पितरों के निमित्त दान के महत्व को मनुस्मृति में भी बताया गया है-

यद्यद्ददाति विधिवत्सम्यक् श्रद्धासमन्वितः।

तत्तत्पितॄणां भवति परत्रानन्तमक्षयम्॥

-मनुस्मृति, अध्याय 3, श्लोक 265

अर्थ: श्रद्धायुक्त व्यक्ति विधिपूर्वक जो कुछ पितरों के निमित्त देता है, वह परलोक में पितरों के लिए अक्षय होता है।

इस शास्त्रीय भाव के साथ सर्व पितृ अमावस्या पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार पितरों के निमित्त दान और सेवा का संकल्प लेना चाहिए।

 

सर्व पितृ अमावस्या पर भोजन सेवा से जुड़ें

सर्व पितृ अमावस्या के पुण्यदायी अवसर पर नारायण सेवा संस्थान के दीन-दुःखी, निर्धन और दिव्यांग बच्चों के लिए भोजन सेवा में सहयोग करें। किसी जरूरतमंद के जीवन में अन्न और प्रसन्नता पहुंचाकर अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता अर्पित करें। पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें, उनके निमित्त तर्पण और श्राद्ध करें तथा दान एवं भोजन सेवा के माध्यम से मानवता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करें।

सर्व पितृ अमावस्या पर सेवा का दीप जलाएं, पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करें और पुण्य के इस पावन अवसर को मानव सेवा के लिए समर्पित करें।

 

 

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: सर्व पितृ अमावस्या 2026 कब है?
उत्तर: सर्व पितृ अमावस्या 2026 में शनिवार, 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इसी दिन पितृ पक्ष का समापन होगा।

प्रश्न: सर्व पितृ अमावस्या का क्या महत्व है?
उत्तर: सर्व पितृ अमावस्या पितृ पक्ष की अंतिम तिथि है और यह सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के स्मरण एवं सम्मान के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने की परंपरा है।

प्रश्न: क्या सर्व पितृ अमावस्या शुभ होती है?
उत्तर: सर्व पितृ अमावस्या को पितरों के स्मरण और श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान तथा दान-पुण्य किया जाता है।

प्रश्न: सर्व पितृ अमावस्या पर श्राद्ध कैसे करें?
उत्तर: प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करें। अपनी कुल परंपरा के अनुसार तर्पण, श्राद्ध या पिंडदान करें। जरूरतमंदों को भोजन, अन्न, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान भी कर सकते हैं।

प्रश्न: सर्व पितृ अमावस्या 2026 पर श्राद्ध का समय क्या है?
उत्तर: सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 को है। परंपरागत रूप से श्राद्ध कर्म दिन के समय, विशेषकर अपराह्न काल में किया जाता है। सटीक मुहूर्त स्थान के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना उचित है।

प्रश्न: पितृ अमावस्या क्या होती है?
उत्तर: पितृ अमावस्या पूर्वजों के स्मरण और श्राद्ध कर्म से जुड़ी अमावस्या तिथि है। पितृ पक्ष के दौरान सर्व पितृ अमावस्या अंतिम दिन होती है, जिस पर सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान करने की परंपरा है।

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