Narayan Seva Sansthan - देवउठनी एकादशी

देवउठनी एकादशी पर दान देकर दीन-हीन, असहाय, दिव्यांग बच्चों को कराएं भोजन

देवउठनी एकादशी

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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी आते ही मंदिरों में दीपों की आभा बढ़ जाती है और भक्तों के मन में श्रीहरि के जागरण का उत्सव उतर आता है। इसी पावन तिथि को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और उनके जागरण के साथ ही चातुर्मास का समापन होता है। यही कारण है कि यह एकादशी शुभ संकल्पों को फिर से जीवन में उतारने का अवसर मानी जाती है।

 

जब जागते हैं श्रीहरि

भगवान विष्णु का स्वरूप पालन और संरक्षण का प्रतीक है। देवउठनी एकादशी हमें अपने भीतर सोए हुए करुणा और परोपकार के भाव को जगाने की प्रेरणा देती है। इस दिन यदि श्रीहरि के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए यदि किसी जरूरतमंद तक भोजन, सहायता या अपनापन पहुंचाया जाए, तो भक्ति का यह भाव सेवा में बदल जाता है।

इस दिन व्रत, भगवान विष्णु पूजन, हरि नाम का स्मरण, तुलसी पूजन और दान-पुण्य के साथ अपने सामर्थ्य के अनुसार सेवा करना पुण्यकारी माना गया है। भगवान के प्रति आस्था को मानवता के प्रति संवेदना से जोड़ना देवउठनी के संदेश को और सार्थक बनाता है।

 

देवउठनी एकादशी पर लें एक पुण्यदायी संकल्प

हमारे आसपास ऐसे अनेक बच्चे हैं, जिनके लिए पौष्टिक भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता। इस पुण्यदायी अवसर पर किसी भूखे और जरूरतमंद बच्चे को भोजन कराना उसके जीवन में स्नेह और सहारा पहुंचाना है।

इसी भाव के साथ नारायण सेवा संस्थान द्वारा देवउठनी एकादशी के पावन अवसर पर दीन-हीन, निर्धन, असहाय एवं दिव्यांग बच्चों के लिए भोजन सेवा की जा रही है। आप भी इस सेवा से जुड़कर किसी बच्चे की थाली में पौष्टिक एवं मीठा भोजन पहुंचाने में सहभागी बनें।

 

दान में हो निष्काम सेवा का भाव

दान तब और अधिक सार्थक हो जाता है, जब उसमें किसी प्रतिफल की अपेक्षा न हो और सामने वाले की आवश्यकता को प्राथमिकता दी जाए। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने सात्त्विक दान का स्वरूप बताते हुए कहा है-

दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे।

देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्॥

अर्थात् जो दान कर्तव्य समझकर, उचित समय और स्थान पर, योग्य पात्र को बिना किसी प्रत्युपकार की अपेक्षा के दिया जाता है, वह सात्विक दान कहलाता है।

देवउठनी एकादशी पर इस भाव को अपने जीवन में उतारते हुए जरूरतमंदों की सहायता करना, भूखे को भोजन कराना और असहाय के जीवन में सहारा बनना सेवा का सुंदर माध्यम है। दान की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उससे किसी के जीवन की आवश्यकता पूरी हो और उसके चेहरे पर संतोष की मुस्कान आए।

 

श्रीहरि के जागरण पर अपने भीतर भी जगाएं सेवा भाव 

देवउठनी एकादशी पर दीप जलाएं, श्रीहरि का नाम लें, तुलसी-शालिग्राम का पूजन करें और अपने सामर्थ्य के अनुसार दान-सेवा का संकल्प लें। इस पावन तिथि पर किया गया एक छोटा-सा सत्कर्म किसी जरूरतमंद के लिए बड़ी खुशी बन सकता है।

आइए, भगवान विष्णु के जागरण के इस पावन पर्व पर भक्ति को सेवा का रूप दें। किसी जरूरतमंद बच्चे की थाली तक भोजन पहुंचाएं और मानव सेवा के इस पुण्यदायी कार्य में सहभागी बनें।

देवउठनी एकादशी

देवउठनी एकादशी पर दीन-हीन, असहाय, दिव्यांग बच्चों को भोजन कराने में सहयोग करें

आपके द्वारा दिए गए दान से दिव्यांग बच्चों को भोजन कराया जाएगा

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Account Name
Narayan Seva Sansthan
Bank Name
STATE BANK OF INDIA
Account Number
31505501196
IFSC Code
SBIN0011406
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