04 June 2026

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 2026, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और दान-पुण्य का महत्व

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सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को आत्मशुद्धि, पितृ स्मरण और ईश्वर साधना का विशेष दिन माना गया है। जब ज्येष्ठ अधिक अमावस्या अधिक मास में आए, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या का पावन अवसर सोमवार को पड़ रहा है। सोमवार के दिन आने के कारण इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दुर्लभ संयोग लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है और इस दिन किए गए स्नान, दान, जप, तप एवं सेवा का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

ज्येष्ठ अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, जो भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित माना गया है। यह संपूर्ण महीना भक्ति, साधना और पुण्य कर्मों के लिए श्रेष्ठ माना गया है। ऐसे में इस मास की अमावस्या इस बार श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यदायी अवसर लेकर आ रही है।

 

कब है ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 2026?

द्रिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या 15 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि का प्रारंभ 14 जून 2026 को दोपहर 12:19 बजे से होगा और इसका समापन 15 जून 2026 को सुबह 08:23 बजे तक होगा। चूंकि 15 जून को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन पवित्र स्नान, पितृ तर्पण, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की पूजा करना विशेष फलदायी होगा।

 

तीन वर्ष में क्यों आती है अधिक अमावस्या?

हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि अंग्रेजी कैलेंडर सूर्य की गति के अनुसार चलता है। चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है और सौर वर्ष लगभग 365 दिनों का। दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर तीन वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है।

इसी कारण अधिक मास और उसकी अमावस्या भी हर तीन वर्ष में एक बार आती है। यह दुर्लभ समय आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य संचय के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

 

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या का धार्मिक महत्व

भगवान विष्णु के प्रिय मास पुरुषोत्तम मास में आने के कारण अधिक अमावस्या को सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया दान-पुण्य और जप-तप अक्षय फल प्रदान करता है। यह दिन भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और जीवन के कष्टों को दूर करने के लिए विशेष माना गया है।

अधिक मास भगवान पुरुषोत्तम श्रीहरि विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन विष्णुसहस्रनाम का पाठ, श्रीमद्भागवत कथा श्रवण और सत्यनारायण भगवान की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हिन्दू धर्म में मान्यता है कि भगवान विष्णु इस दिन भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

 

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या की पूजा विधि

  • इस पावन दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ माना जाता है।
  • स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें और व्रत का संकल्प लें। इसके पश्चात भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। पीले पुष्प, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।
  • ज्येष्ठ अधिक अमावस्या में तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व है। सुबह और शाम तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जलाएं। 
  • दोपहर के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों स्मरण करें।
  • शाम के समय पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है।

 

दान का महत्व 

सनातन धर्म में दान को मानव जीवन का सर्वोच्च कर्म माना गया है। विशेष रूप से ज्येष्ठ अधिक अमावस्या जैसे दुर्लभ और पवित्र अवसर पर किया गया दान कई गुना अधिक फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में किए गए दान, जप, तप और सेवा का पुण्य अक्षय हो जाता है, अर्थात उसका शुभ फल कभी नष्ट नहीं होता। यही कारण है कि इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करना, भूखों को भोजन कराना, प्यासों को जल पिलाना और असहाय लोगों की सेवा करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।

ज्येष्ठ मास वर्ष का सबसे गर्म समय माना जाता है। ऐसे में इस अवधि में जलदान और अन्नदान का विशेष महत्व बताया गया है। 

 

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने सात्त्विक दान का महत्व बताते हुए कहा है-

दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे।

देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्॥

अर्थात जो दान बिना किसी स्वार्थ, दिखावे या फल की इच्छा के, उचित समय पर योग्य व्यक्ति को केवल कर्तव्य समझकर दिया जाए, वही सात्त्विक दान कहलाता है। 

 

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या ऐसा ही पवित्र समय है, जब श्रद्धा और नि:स्वार्थ भाव से किया गया दान जीवन में आध्यात्मिक शांति और ईश्वरीय कृपा प्रदान करता है। शास्त्रों के अनुसार सेवा और दान से न केवल व्यक्ति के पापों का क्षय होता है, बल्कि उसके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

 

अमावस्या पर करें ये विशेष उपाय

  • दीन-हीन, असहाय, जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं
  • राहगीरों को ठंडा पानी और शर्बत पिलाएं
  • गौसेवा करें और गाय को हरा चारा एवं गुड़ खिलाएं
  • चींटियों को शक्कर मिला आटा डालें
  • घर के ईशान कोण में घी का दीपक जलाएं
  • विष्णुसहस्रनाम और श्रीमद् भगवतगीता का पाठ करें

 

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या पर करें सेवा और पाएं आशीर्वाद

ज्येष्ठ अधिक अमावस्या पुण्य प्राप्ति का अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करने, भूखों को भोजन कराने और असहाय लोगों की सेवा करने से भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इस पावन अवसर पर नारायण सेवा संस्थान के सेवा कार्यों से जुड़कर नारायण रूपी दीन-हीन, असहाय, दिव्यांग एवं जरूरतमंद बच्चों को भोजन कराने के सेवा प्रकल्प में सहयोग करें और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करें।

 

 

 

 

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 

 

प्रश्न: ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 2026 कब है?

उत्तर: ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 15 जून 2026 को मनाई जाएगी। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जाएगा।

 

प्रश्न: ज्येष्ठ अधिक अमावस्या पर कौन-सा दान श्रेष्ठ माना गया है?

उत्तर: ज्येष्ठ अधिक अमावस्या पर भोजन दान, अन्न दान, जलदान और जरूरतमंदों की सेवा को सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

 

प्रश्न: ज्येष्ठ अधिक अमावस्या पर कौन से भगवान की पूजा की जाती है?

उत्तर: इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है।

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