दान करें
ज्येष्ठ अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है, सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित माना गया है। यह पावन मास जप, तप, व्रत, दान और सेवा के लिए विशेष फलदायी होता है। मान्यता है कि इस मास में श्रद्धा भाव से किया गया प्रत्येक सत्कर्म अनेक गुना पुण्य प्रदान करता है।
सनातन परंपरा के धर्मग्रंथों के अनुसार अधिक मास स्वयं भगवान विष्णु का प्रिय मास माना गया है। इस पवित्र काल में दान-पुण्य, विशेष रूप से अन्नदान, साधक को अक्षय फल प्रदान करता है। कहा जाता है कि इस माह में किया गया सेवा कार्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
महापर्व का महत्व ज्येष्ठ अधिक मास आत्मशुद्धि, भक्ति और सेवा का दिव्य अवसर है। इस मास में भगवान विष्णु की आराधना, मंत्र जाप, कथा श्रवण और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में किया गया हर पुण्य कर्म कई गुना बढ़कर फल देता है। यह समय मानव सेवा और परोपकार का श्रेष्ठ अवसर है।
दान-पुण्य का दिव्य फल धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि अधिक मास में अन्न और भोजन का दान अत्यंत शुभ माना जाता है। इस माह में विशेष रूप से जरूरतमंदों और असहाय बच्चों को भोजन कराना भगवान नारायण की सेवा के समान माना गया है।
“अन्नदानं महादानम्” अर्थात सभी दानों में अन्नदान सर्वोत्तम माना गया है।
आपके दान से मिलेगा भोजन आपके द्वारा दिए गए सहयोग से दीन-हीन, असहाय, निर्धन और दिव्यांग बच्चों को भोजन कराया जाएगा।
इस ज्येष्ठ अधिक मास के पुण्यदायी अवसर पर नारायण सेवा संस्थान दिव्यांग एवं जरूरतमंद बच्चों के लिए भोजन सेवा प्रकल्प चला रहा है। इस दिव्य सेवायज्ञ में सहभागी बनें और सेवा प्रकल्प में सहयोग कर पुण्य के भागी बनें।
39,694,329 रोगी भोजन सेवा
452,569 सुधारात्मक सर्जरी संपन्न
398,535 कैलिपर्स वितरित
39,591 कृत्रिम अंग वितरित