आपका सहयोग : एक दिव्यांग बच्चें का नया खुशहाल जीवन
सहयोग करेंपुरूषोत्तम मास को सनातन परंपरा में सेवा, साधना और सत्कर्म का विशेष मास माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार यह मास आत्मचिंतन, भक्ति और परोपकार के लिए अत्यंत शुभ और पुण्यदायी होता है। मान्यता है कि इस पावन मास में किया गया हर अच्छा कार्य कई गुना फल प्रदान करता है और जीवन में सुख-शांति तथा समृद्धि लाता है।
ऐसे दिव्य मास में दान, जप-तप, पूजा-पाठ और जरूरतमंदों की सहायता का विशेष महत्व बताया गया है। किसी भूखे को भोजन कराना, बीमार या असहाय व्यक्ति की मदद करना, या किसी के जीवन में आशा की किरण बनना—ये सभी कार्य ईश्वर की सच्ची सेवा माने जाते हैं। पुरूषोत्तम मास हमें यह अवसर देता है कि हम अपने जीवन में करुणा, दया और सेवा की भावना को और मजबूत करें।
आज भी हमारे समाज में कई दिव्यांग बच्चे ऐसे हैं जो चल नहीं पाते, जो अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाते।
नारायण सेवा का संकल्प
यह सिर्फ इलाज नहीं… बल्कि एक नई जिंदगी की शुरुआत है
उच्च गुणवत्ता वाले जापानी एवं जर्मन तकनीक से निर्मित 3-डी प्रिन्टेड नारायण मॉड्यूलर आर्टिफिशियल लिंब लगाकर बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें चलने की ताकत देना।
विशेषज्ञों द्वारा सुरक्षित और नि:शुल्क ऑपरेशन करके बच्चों को सामान्य जीवन की ओर वापस लाना।
पुरूषोत्तम मास के पावन अवसर पर दिव्यांग एवं निर्धन बच्चों को पौष्टिक एवं स्वादिष्ट मीठा भोजन कराएं
पुरूषोत्तम मास को सनातन परंपरा में सेवा, साधना और सत्कर्म का विशेष मास माना जाता है। इस दौरान किया गया हर अच्छा कार्य कई गुना फलदायी होता है। ऐसे पवित्र मास में, किसी जरूरतमंद की मदद करना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है।
39,658,326 रोगी भोजन सेवा
450,554 सुधारात्मक सर्जरी संपन्न
395,728 कैलिपर्स वितरित
38,780 कृत्रिम अंग वितरित
इस पुरूषोत्तम मास, 5000 दिव्यांग बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा करना।
आपका एक छोटा सा दान किसी बच्चे की पूरी जिंदगी बदल सकता है।
इस पुरूषोत्तम मास एक संकल्प लें:
दिव्यांग एवं निर्धन बच्चों का जीवन खुशहाल बनाने का
सच्चा पुण्य वही है जो किसी के जीवन में बदलाव लाए