31 July 2026

हरियाली अमावस्या 2026: जानें कब है श्रावण अमावस्या, शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि और दान का महत्व

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सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे माह में शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और व्रत, पूजा व अभिषेक का विशेष महत्व रहता है। इसी पावन महीने में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। इसे श्रावण अमावस्या या सावन अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।

हरियाली अमावस्या प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है। इस दिन पौधारोपण, भगवान शिव की पूजा, पितरों का तर्पण और दान-पुण्य करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए शुभ कार्यों का कई गुना पुण्य प्राप्त होता है।

 

हरियाली अमावस्या 2026 कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में हरियाली अमावस्या 12 अगस्त, बुधवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि का प्रारंभ 12 अगस्त को रात्रि 1 बजकर 52 मिनट पर होगा और इसका समापन 13 अगस्त को सुबह 8 बजकर 23 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म में उदयातिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए हरियाली अमावस्या का व्रत और पूजन 12 अगस्त को किया जाएगा।

 

सावन अमावस्या को हरियाली अमावस्या क्यों कहते हैं?

सावन का महीना वर्षा ऋतु का सबसे सुंदर समय माना जाता है। इस दौरान धरती हरी-भरी हो जाती है और चारों ओर हरियाली दिखाई देती है। खेतों में नई फसल लहलहाने लगती है और पेड़-पौधे नए जीवन से भर उठते हैं। इसी कारण सावन की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली समृद्धि, सुख और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति के संरक्षण और वृक्षों के महत्व का संदेश देता है।

 

हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को स्नान, दान और पितृ तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। वहीं सावन में पड़ने वाली अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह भगवान शिव की प्रिय तिथियों में से एक मानी जाती है।

मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने, भगवान शिव का पूजन करने, पितरों का तर्पण करने और जरूरतमंदों को दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। कई धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि श्रद्धा से किए गए दान और सेवा से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

 

हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण का महत्व

हरियाली अमावस्या का सबसे प्रमुख संदेश प्रकृति की रक्षा करना है। वर्षा ऋतु में लगाए गए पौधे आसानी से विकसित होते हैं, इसलिए इस दिन पौधारोपण करना बेहद शुभ माना गया है।

इस अवसर पर पीपल, बरगद, नीम, बेल, शमी, कदंब, आंवला और आम जैसे पौधे लगाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के साथ-साथ इन वृक्षों का पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान है। एक पौधा लगाना आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का उपहार देने के समान माना जाता है।

 

हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है, इसलिए हरियाली अमावस्या के दिन शिव पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन भक्त शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित करते हैं।

कई श्रद्धालु इस दिन रुद्राभिषेक भी कराते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से परिवार में सुख-शांति आती है, कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

 

हरियाली अमावस्या पर क्या करें?

हरियाली अमावस्या के दिन सुबह स्नान कर भगवान शिव की पूजा करें। पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें और उसकी परिक्रमा करें। पितरों के निमित्त तर्पण करें तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें। यदि संभव हो तो इस दिन कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल का संकल्प लें।

 

हरियाली अमावस्या पर क्या न करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन हरे-भरे पेड़-पौधों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। तामसिक भोजन, नशा और किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहना चाहिए। अमावस्या के दिन क्रोध, कटु वचन और नकारात्मक विचारों से बचने की भी सलाह दी जाती है।

 

दान का महत्व

हरियाली अमावस्या पर दान को विशेष पुण्य देने वाला माना गया है। विशेष रूप से अन्नदान को सबसे श्रेष्ठ दान बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार भूखे व्यक्ति को भोजन कराना अनेक यज्ञों के समान फलदायी माना जाता है। सनातन परंपरा के विभिन्न ग्रंथों में दान के महत्व को विस्तार से बताया गया है।

 

दान की महिमा की उल्लेख करते हुए श्रीमद् भगवतगीता में कहा गया है- 

दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे ।

देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम् ॥ 

जो दान बिना प्रतिफल की कामना से यथोचित समय और स्थान में किसी सुपात्र को दिया जाता है वह सात्विक दान माना जाता है।

यदि इस शुभ अवसर पर आप किसी जरूरतमंद बच्चे, निर्धन परिवार या असहाय व्यक्ति के भोजन की व्यवस्था करते हैं, तो यह भगवान शिव की सच्ची आराधना के समान माना जाता है।

नारायण सेवा संस्थान वर्षों से दीन-हीन, असहाय, निर्धन और दिव्यांगजनों की नि:स्वार्थ सेवा कर रहा है। हरियाली अमावस्या के इस पुण्यदायी अवसर पर आप संस्थान के अन्नदान सेवा प्रकल्प में सहयोग कर जरूरतमंद बच्चों तक भोजन पहुंचाएं और देवाधिदेव महादेव की कृपा प्राप्त करें। 

 

 

 

 

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

 

प्रश्न: हरियाली अमावस्या कब है?

उत्तर: द्रिक पंचांग के अनुसार हरियाली अमावस्या 12 अगस्त 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। 

प्रश्न: हरियाली अमावस्या और सावन अमावस्या में क्या अंतर है?

उत्तर: सावन माह की अमावस्या को ही हरियाली अमावस्या या श्रावण अमावस्या कहा जाता है।

प्रश्न: हरियाली अमावस्या पर कौन-से पौधे लगाना शुभ माना जाता है?

उत्तर: इस दिन पीपल, बरगद, नीम, बेल, शमी, कदंब, आंवला, आम और पारिजात जैसे पौधे लगाना शुभ माना जाता है।

प्रश्न: हरियाली अमावस्या पर कौन-सा दान सबसे श्रेष्ठ माना गया है?

उत्तर: हरियाली अमावस्या पर अन्नदान को सर्वोत्तम दान माना गया है।

प्रश्न: हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण क्यों किया जाता है?

उत्तर: वर्षा ऋतु पौधों के विकास के लिए सबसे अनुकूल समय होती है। इसलिए हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण करने से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ धार्मिक पुण्य की भी प्राप्ति होती है।

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