सनातन धर्म की पावन परंपराओं में पुरुषोत्तम मास का स्थान अत्यंत उच्च और कल्याणकारी माना गया है। यह मास भगवान श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर है। इस दिव्य काल में किए गए जप, तप, दान और व्रत साधक के जीवन को पवित्र बनाते हैं और उसे भौतिक तथा आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करते हैं।
सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। यह दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और माँ लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष फलदायी होता है। जब यह पूर्णिमा पुरुषोत्तम मास अर्थात अधिक मास में आती है, तब इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।