सनातन धर्म में, वर्ष में आने वाली सभी एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन जब बात पुरुषोत्तमी एकादशी की आती है, तो इसका आध्यात्मिक प्रभाव और भी बढ़ जाता है। यह पुण्यदायी एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होती है और अधिक मास में आने के कारण अत्यंत दुर्लभ एवं फलदायी मानी जाती है।
इसे पद्मिनी एकादशी अथवा परमा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख, शांति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
वर्ष 2026 में पुरुषोत्तमी एकादशी अधिक मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 26 मई 2026 को प्रातः 5:10 बजे आरंभ होगी और 27 मई 2026 को प्रातः 6:21 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर यह व्रत 27 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा।
अधिक मास को ‘पुरुषोत्तम मास’ कहा जाता है, क्योंकि यह भगवान विष्णु के ‘पुरुषोत्तम’ स्वरूप को समर्पित है। इसी कारण इस मास में आने वाली एकादशी को पुरुषोत्तमी एकादशी कहा जाता है। इसे पद्मिनी एकादशी भी कहा जाता है, क्योंकि यह भक्तों के जीवन में कमल के समान पवित्रता, सौभाग्य और आध्यात्मिक प्रकाश लाने वाली मानी गई है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस व्रत का पालन करने से मनुष्य को समस्त दुखों से मुक्ति मिलती है और अंत में विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। यह एकादशी सभी एकादशियों में श्रेष्ठ मानी गई है।
पुरुषोत्तमी एकादशी का समय मनुष्य जीवन के लिए आत्मशुद्धि और ईश्वर भक्ति का दिव्य अवसर है। इस दिन मन, वचन और कर्म की पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु का स्मरण करता है, उसके अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
पुरुषोत्तमी एकादशी का यह व्रत व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, संयम और सेवा भाव का संचार करता है। विशेष रूप से अधिक मास में किया गया जप, तप, दान और भक्ति अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है।
सनातन संस्कृति में दान को धर्म का श्रेष्ठ अंग कहा गया है। विशेष रूप से पुरुषोत्तमी एकादशी के दिन किया गया दान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्त के जीवन में सुख एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
दान का उल्लेख हिन्दू धर्म के विभिन्न ग्रंथों में मिलता है। पद्म पुराण में दान का उल्लेख करते हुए कहा गया है
तीर्थे नदीतटे वापि देवालये विशेषतः।
जप्यं दानं तपः कर्म सर्वमक्षयमश्नुते॥
अर्थात् तीर्थ स्थान, नदी तट या देवालय में किया गया जप, दान और तप-कर्म अक्षय पुण्य प्रदान करता है।
इस पावन अवसर पर श्रद्धानुसार निम्न वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है-
मान्यता है कि नि:स्वार्थ भाव से किया गया दान भगवान श्रीहरि को अत्यंत प्रिय होता है और जीवन में पुण्य, सुख एवं मानसिक शांति प्रदान करता है। इस पुरुषोत्तमी एकादशी पर नारायण सेवा संस्थान के दीन-हीन, असहाय, दिव्यांग बच्चों को भोजन कराने के सेवा प्रकल्प में सहयोग करें और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।
पुरुषोत्तमी एकादशी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ और दिव्य अवसर है। यह दिन आत्मचिंतन, सेवा, दान और भक्ति का संदेश देता है। जो भक्त इस दिन श्रद्धापूर्वक उपवास, पूजा और दान करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मकता, आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर की कृपा का संचार होता है।
इस पावन अवसर पर भगवान श्रीहरि का स्मरण करें, जरूरतमंदों की सहायता करें और धर्म एवं मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लें।
प्रश्न: पुरुषोत्तमी एकादशी 2026 कब है?
उत्तर: पुरुषोत्तमी एकादशी वर्ष 2026 में 27 मई, बुधवार को मनाई जाएगी।
प्रश्न: पुरुषोत्तमी एकादशी कितने साल में एक बार आती है?
उत्तर: यह एकादशी केवल अधिक मास में आती है, जो हर तीन वर्ष में एक बार पड़ता है।
प्रश्न: पुरुषोत्तमी एकादशी पर क्या दान करना शुभ माना जाता है?
उत्तर: इस दिन भोजनदान, अन्नदान, जलसेवा तथा जरूरतमंदों की सहायता करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।