हिंदू पंचांग की गणना दुनिया की सबसे सटीक गणनाओं में से एक मानी जाती है। इसी गणना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है अधिक मास । अक्सर लोग इसे केवल एक ‘अतिरिक्त महीना’ मानते हैं, लेकिन अध्यात्म की दृष्टि से यह स्वयं को शुद्ध करने और पुण्य संचित करने का सबसे बड़ा अवसर है।
वर्ष 2026 में आ रहा ज्येष्ठ अधिक मास उन सभी के लिए विशेष है जो सेवा और दान के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं।
सरल शब्दों में, सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच के अंतर को पाटने के लिए हर 32.5 महीने में कैलेंडर में जो अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, उसे अधिक मास कहते हैं। खगोलीय दृष्टि से, सूर्य वर्ष 365 दिन 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है। इस 11 दिनों के अंतर को ठीक करने के लिए वैज्ञानिक रूप से ‘अधिक मास’ की व्यवस्था की गई है।
इसे ‘मल मास’ भी कहा जाता है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक शक्ति के कारण इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से सबसे अधिक ख्याति मिली है।
अधिक मास मनाने के पीछे गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य प्रकृति और ब्रह्मांड के साथ तालमेल बिठाना है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस महीने का कोई स्वामी नहीं था, तब भगवान विष्णु ने इसे अपनाया।
हम इसे इसलिए मनाते हैं ताकि हम अपनी व्यस्त जीवनशैली से थोड़ा समय निकालकर ‘स्व’ और ‘सेवा’ पर ध्यान दे सकें। यह समय नई भौतिक शुरुआत के बजाय पुरानी गलतियों के सुधार और आत्म-मंथन के लिए मनाया जाता है।
समय और पंचांग के अनुसार, अधिक मास अलग-अलग रूपों में आता है:
अधिक मास में किए गए दान का फल अन्य महीनों की तुलना में अनंत गुना अधिक होता है। इस समय ‘अन्नदान’ को सबसे बड़ा दान माना गया है। विशेषकर ज्येष्ठ अधिक मास की भीषण गर्मी में प्यासों को पानी और भूखों को भोजन कराना साक्षात ईश्वर की सेवा माना जाता है।
इस ज्येष्ठ अधिक मास, आपकी करुणा किसी के अंधेरे जीवन में उजाला ला सकती है। नारायण सेवा संस्थान वर्षों से दिव्यांग भाई-बहनों और असहाय बच्चों की सेवा में समर्पित है।
आप इस अधिक मास में हमारे साथ जुड़कर निम्न माध्यमों से पुण्य कमा सकते हैं:
“इस अधिक मास में आपका एक छोटा सा ‘अतिरिक्त’ प्रयास, किसी के जीवन में ‘असाधारण’ बदलाव ला सकता है।”
प्रश्न. अधिक मास 2026 की तिथियां क्या हैं?
उत्तर: 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा।
प्रश्न. अधिक मास में कौन से कार्य नहीं करने चाहिए?
उत्तर: इस महीने में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए व्यापार की शुरुआत जैसे ‘काम्य कर्म’ नहीं किए जाते हैं।
प्रश्न. अधिक मास में दान का क्या महत्व है?
उत्तर: ज्येष्ठ का महीना गर्मी का होता है। इस समय जल, फल और अन्न का दान करने से मानसिक शांति और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
प्रश्न. क्या अधिक मास हर साल आता है?
उत्तर: नहीं, अधिक मास हर 32 महीने, 16 दिन और 8 घंटे के अंतर पर आता है (लगभग हर तीसरे साल)।