देखने में दिक्कत किसी व्यक्ति की अपने आस-पास की दुनिया को देखने की क्षमता पर काफ़ी असर डाल सकती है। अच्छी बात यह है कि टेक्नोलॉजी में तरक्की से कई तरह के मददगार टूल आए हैं। ये देखने में दिक्कत वाले लोगों की आज़ादी बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं। ये उनकी पूरी ज़िंदगी की क्वालिटी को भी बेहतर बनाते हैं।
स्क्रीन रीडर ज़रूरी टूल हैं जो ऑन-स्क्रीन टेक्स्ट को सिंथेसाइज़्ड स्पीच में बदलते हैं। इससे देखने में दिक्कत वाले लोग डिजिटल कंटेंट एक्सेस कर सकते हैं। ये टेक्नोलॉजी कंप्यूटर, स्मार्टफोन और टैबलेट पर आसानी से मिल जाती हैं। इस सेक्शन के सबहेडिंग में ये शामिल हैं:
कंप्यूटर-आधारित स्क्रीन रीडर:
JAWS, NVDA, और VoiceOver जैसे कंप्यूटर-बेस्ड स्क्रीन रीडर पॉपुलर ऑप्शन हैं। वे वेब पेज और डॉक्यूमेंट्स में पूरी तरह से नेविगेशन देते हैं। कुछ मॉडल ब्रेल डिस्प्ले को भी सपोर्ट करते हैं।
मोबाइल डिवाइस स्क्रीन रीडर:
स्मार्टफोन और टैबलेट के लिए स्क्रीन रीडर में Android के लिए TalkBack और iOS के लिए VoiceOver शामिल हैं । ये यूज़र्स को ऐप्स और मैसेज को एक्सेस करने और उनसे इंटरैक्ट करने की सुविधा देते हैं। यूज़र्स अपने डिवाइस पर दूसरे कंटेंट के साथ भी जुड़ सकते हैं।
OCR सॉफ्टवेयर प्रिंटेड टेक्स्ट को डिजिटल फॉर्मेट में बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है। फिर इन्हें असिस्टिव टेक्नोलॉजी के ज़रिए एक्सेस किया जा सकता है। इस सेक्शन के तहत सबहेडिंग में शामिल हैं:
स्टैंडअलोन OCR स्कैनर:
हैंडहेल्ड स्कैनर जैसे डिवाइस फिजिकल डॉक्यूमेंट या किताबों से टेक्स्ट कैप्चर करते हैं। यूज़र लेबल भी स्कैन कर सकते हैं। फिर टेक्स्ट को स्क्रीन रीडर से ज़ोर से पढ़ा जाता है।
मोबाइल OCR ऐप्स:
कई स्मार्टफोन ऐप चलते-फिरते OCR फंक्शन देते हैं। उदाहरण के लिए KNFB रीडर और सीइंग AI। ये यूज़र्स को रेस्टोरेंट के मेन्यू और साइन जैसे सोर्स से टेक्स्ट पहचानने और पढ़ने में मदद करते हैं। ये प्रोडक्ट लेबल के लिए भी काम के हैं।
स्क्रीन मैग्निफिकेशन सॉफ्टवेयर कंप्यूटर स्क्रीन पर कंटेंट को बड़ा करता है। इससे कम नज़र वाले लोगों के लिए यह ज़्यादा आसान हो जाता है। इस सेक्शन के तहत सबहेडिंग में शामिल हैं:
डेस्कटॉप स्क्रीन मैग्निफायर:
ZoomText और SuperNova जैसे डेस्कटॉप मैग्निफायर टेक्स्ट और इमेज का साइज़ बढ़ाते हैं। वे कलर कंट्रास्ट के लिए कस्टमाइज़ेशन ऑप्शन भी देते हैं। यूज़र्स कर्सर एन्हांसमेंट से भी फ़ायदा उठा सकते हैं।
मोबाइल स्क्रीन मैग्निफायर:
स्मार्टफोन और टैबलेट में स्क्रीन मैग्निफिकेशन फीचर पहले से होते हैं। उदाहरण के लिए iOS पर ज़ूम और एंड्रॉयड पर मैग्निफिकेशन। ये मोबाइल डिवाइस पर कंटेंट को बड़ा करने का एक तेज़ तरीका देते हैं।
ब्रेल डिस्प्ले और एम्बॉसर डिजिटल कंटेंट को छूने पर एक्सेस देते हैं। ये उन लोगों के लिए हैं जो ब्रेल में माहिर हैं। इस सेक्शन के तहत सबहेडिंग में शामिल हैं:
ब्रेल डिस्प्ले:
ये डिवाइस कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस से कनेक्ट होते हैं। ये स्क्रीन पर दिखने वाले टेक्स्ट को ब्रेल अक्षरों में बदलते हैं। इससे यूज़र अपनी उंगलियों का इस्तेमाल करके डिजिटल कंटेंट को पढ़ और उससे इंटरैक्ट कर सकते हैं।
ब्रेल एम्बॉसर:
ब्रेल एम्बॉसर कागज़ पर उभरी हुई टैक्टाइल आउटपुट देते हैं। इससे यूज़र डिजिटल डॉक्यूमेंट्स की फिजिकल ब्रेल कॉपी बना सकते हैं।
अनजान जगहों पर नेविगेट करना, देखने में दिक्कत वाले लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है। रास्ता खोजने और नेविगेशन टेक्नोलॉजी मदद करती हैं। इस सेक्शन के तहत सबहेडिंग में शामिल हैं:
इनडोर नेविगेशन ऐप्स:
ब्लाइंडस्क्वेयर और नियरबाय एक्सप्लोरर जैसे ऐप्स GPS और ब्लूटूथ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। वे इनडोर जगहों पर नेविगेट करने के लिए ऑडियो क्यू देते हैं। इनमें एयरपोर्ट, शॉपिंग मॉल और पब्लिक बिल्डिंग शामिल हैं।
आउटडोर नेविगेशन ऐप्स:
Lazarillo जैसे आउटडोर नेविगेशन ऐप सुरक्षित नेविगेशन देते हैं। यूज़र सड़कों और फुटपाथों पर नेविगेट कर सकते हैं। ये ऐप आस-पास की दिलचस्प जगहों के बारे में जानकारी देते हैं।
कुछ लोगों को सुनने में भी दिक्कत हो सकती है। ऑडिटरी असिस्टिव टेक्नोलॉजी उन लोगों के लिए है जिन्हें देखने और सुनने में दिक्कत है। इस सेक्शन के तहत सबहेडिंग में शामिल हैं:
असिस्टिव डिवाइस में ऑडिटरी फ़ीडबैक:
कई असिस्टिव डिवाइस विज़ुअल आउटपुट के साथ-साथ ऑडिटरी फ़ीडबैक भी देते हैं। उदाहरण के लिए, स्क्रीन रीडर और OCR सिस्टम। इससे यह पक्का होता है कि सुनने में दिक्कत वाले यूज़र भी जानकारी को अच्छे से एक्सेस कर सकें।
स्पर्शनीय प्रतिक्रिया:
कुछ असिस्टिव टेक्नोलॉजी में टैक्टाइल फ़ीडबैक होता है। इससे यूज़र वाइब्रेशन या खास पैटर्न महसूस करके जानकारी समझ सकते हैं। यह उन लोगों के लिए खास तौर पर मददगार है जो देख नहीं सकते और देख नहीं सकते। यह डिजिटल कंटेंट के साथ इंटरैक्ट करने के दूसरे तरीके देता है।
वॉइस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी बहुत ज़्यादा एडवांस्ड हो गई है। यह इसे असिस्टिव डिवाइस के लिए एक ज़रूरी फ़ीचर बनाता है। इस सेक्शन के तहत सबहेडिंग में शामिल हैं:
वॉयस कमांड सिस्टम:
वॉइस कमांड का इस्तेमाल डिवाइस के अलग-अलग हिस्सों को कंट्रोल करने के लिए किया जा सकता है। ये यूज़र्स को इंटरफ़ेस नेविगेट करने और टेक्स्ट लिखने की सुविधा देते हैं। यूज़र्स सिर्फ़ टच या विज़न पर निर्भर हुए बिना काम कर सकते हैं।
वर्चुअल असिस्टेंट:
एलेक्सा, सिरी और गूगल असिस्टेंट जैसे वर्चुअल असिस्टेंट वॉइस-एक्टिवेटेड सपोर्ट देते हैं। वे रिमाइंडर सेट करने और मैसेज भेजने जैसे कामों में मदद करते हैं। ये असिस्टेंट लोगों की आज़ादी को काफी बढ़ा सकते हैं।
ऑडियो डिस्क्रिप्शन एक्सेसिबिलिटी का एक ज़रूरी हिस्सा है। इसमें विज़ुअल एलिमेंट्स का नैरेटेड डिस्क्रिप्शन देना शामिल है। इनका इस्तेमाल मूवीज़ और टेलीविज़न शो के दौरान किया जाता है। इनका इस्तेमाल लाइव परफॉर्मेंस के लिए भी किया जाता है। इस सेक्शन के तहत सबहेडिंग्स में शामिल हैं:
ऑडियो डिस्क्रिप्टिव सर्विसेज़:
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और थिएटर तेज़ी से ऑडियो वाला कंटेंट दे रहे हैं। इससे यूज़र बेहतर ऑडियो डिस्क्रिप्शन वाली फ़िल्मों का मज़ा ले सकते हैं। इन डिस्क्रिप्शन में सीन और एक्शन शामिल होते हैं।
आसानी से मिलने वाली ई-बुक्स और ऑडियोबुक्स:
डिजिटल किताबें अक्सर आसान फ़ॉर्मैट में मिलती हैं। इनमें रीफ़्लोएबल टेक्स्ट वाली ई-बुक्स और ऑडियोबुक्स शामिल हैं। इससे यह पक्का होता है कि देखने में दिक्कत वाले रीडर्स भी लिटरेचर का मज़ा ले सकें। वे एजुकेशनल मटीरियल भी एक्सेस कर सकते हैं।
निष्कर्ष
असिस्टिव टेक्नोलॉजी ने देखने में दिक्कत वाले लोगों की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव किया है। ये उन्हें दुनिया से ज़्यादा आज़ादी से जुड़ने में मदद करती हैं। ये टूल्स लगातार बेहतर हो रहे हैं। ये टेक्नोलॉजी को सभी लोगों के लिए ज़्यादा शामिल बनाती हैं। यह उनकी देखने की काबिलियत पर ध्यान दिए बिना लागू होता है।
नारायण सेवा संस्थान खास ज़रूरतों को पूरा करने वाले कई प्रोग्राम चलाता है। इनमें आंखों का फ्री चेक-अप शामिल है। वे चश्मे और ब्रेल किट जैसी फ्री मदद बांटते हैं। जब भी मुमकिन हो, वे नज़र वापस लाने के लिए सर्जरी भी करते हैं। इसके अलावा, संगठन स्किल डेवलपमेंट पर भी फोकस करता है। वोकेशनल ट्रेनिंग लोगों को इंडिपेंडेंट और प्रोडक्टिव ज़िंदगी जीने में मदद करती है।