सनातन धर्म में वैशाख पूर्णिमा को अत्यंत पवित्र, पुण्यदायी और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व वाली तिथि माना गया है। यह दिन धर्म, तप, साधना, स्नान, दान और ईश्वर आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा तिथि स्वयं ही अत्यंत मंगलकारी होती है, किंतु वैशाख मास में आने वाली यह पूर्णिमा विशेष रूप से भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्ति का श्रेष्ठ अवसर मानी जाती है।
वैशाख मास को भगवान विष्णु का प्रिय मास कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, जप, तप और दान करने से साधक को अक्षय पुण्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
यह तिथि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, पारिवारिक सुख और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।
वर्ष 2026 में वैशाख पूर्णिमा 1 मई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
पूर्णिमा तिथि का आरंभ 30 अप्रैल 2026 की रात्रि 9:12 बजे से होगा और इसका समापन 1 मई 2026 की रात्रि 10:52 बजे पर होगा।
उदयातिथि के अनुसार 1 मई को स्नान, व्रत, पूजन और दान-पुण्य करना शुभ रहेगा।
शास्त्रों में वैशाख मास को पुण्य और तप का मास कहा गया है। इस मास की पूर्णिमा तिथि पर किए गए धार्मिक कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है। विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, मंत्र जाप, दीपदान और दान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और प्रभु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मान्यता है कि इस दिन प्रातःकाल किसी पवित्र नदी, सरोवर या घर पर गंगाजल युक्त जल से स्नान करने से समस्त पापों का क्षय होता है। इसके पश्चात भगवान विष्णु का पूजन करने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
इस पावन दिन चंद्रमा की पूर्ण कलाएं भी मन और आत्मा को शुद्धता एवं शांति प्रदान करती हैं। इसलिए यह तिथि मानसिक संतुलन, आध्यात्मिक जागरण और सकारात्मकता के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
वैशाख पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्नान के पश्चात स्वच्छ एवं पीले वस्त्र धारण कर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। इसके बाद भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा का संकल्प लें।
पूजा में भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें।
इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस दिन किए जाने वाले प्रमुख धार्मिक कर्म
ऐसी मान्यता है कि इस दिन धर्मराज के निमित्त जल से भरा कलश, अन्न और तिल का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
सनातन धर्म में दान को महापुण्यकारी कर्म माना गया है। विशेष रूप से कलियुग में दान को धर्म का सर्वोत्तम स्वरूप बताया गया है। शास्त्रों में कहा गया है-
तपः परं कृतयुगे त्रेतायां ज्ञानमुच्यते ।
द्वापरे यज्ञमेवाहुर्दानमेकं कलौ युगे ॥
अर्थात सतयुग में तप, त्रेता में ज्ञान, द्वापर में यज्ञ और कलियुग में दान ही मनुष्य के कल्याण का मुख्य साधन है।
वैशाख पूर्णिमा के दिन किया गया अन्न दान, जल दान और धन दान पुण्य प्रदान करता है। इस दिन विशेष रूप से भूखे, निर्धन, असहाय और दिव्यांग जनों की सहायता करना भगवान की सच्ची सेवा माना गया है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन दिया गया दान व्यक्ति के पापों का क्षय करता है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का मार्ग खोलता है।
वैशाख पूर्णिमा के पावन अवसर पर भूखे को भोजन कराना, असहाय को सहारा देना और जरूरतमंदों की सहायता करना ही सच्चा धर्म है। इस पुण्यकारी अवसर पर नारायण सेवा संस्थान के दीन-हीन, असहाय, दिव्यांग बच्चों के भोजन दान के सेवा प्रकल्प में सहयोग करके भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करें।
प्रश्न : वैशाख पूर्णिमा 2026 कब है?
उत्तर : वैशाख पूर्णिमा वर्ष 2026 में 1 मई, शुक्रवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल की रात्रि 9:12 बजे से प्रारंभ होकर 1 मई की रात्रि 10:52 बजे तक रहेगी।
प्रश्न : वैशाख पूर्णिमा पर किस भगवान की पूजा की जाती है?
उत्तर : इस पावन तिथि पर मुख्य रूप से भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। तुलसी दल, पीले पुष्प और दीप अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है।
प्रश्न : वैशाख पूर्णिमा पर क्या दान करना शुभ होता है?
उत्तर : इस दिन अन्न दान और जरूरतमंदों को भोजन कराना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।