सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे माह में शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और व्रत, पूजा व अभिषेक का विशेष महत्व रहता है। इसी पावन महीने में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। इसे श्रावण अमावस्या या सावन अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।
हर-हर महादेव की गूंज, कांवड़ियों की आस्था, शिवालयों में उमड़ती भक्तों की भीड़ और शिवलिंग पर निरंतर होता जलाभिषेक… श्रावण मास का आगमन केवल पंचांग में एक नए महीने की शुरुआत नहीं, बल्कि शिवभक्ति के उस पावन काल का आरंभ है, जब पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
भारतीय सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं में गुरु को भगवान से भी उच्च स्थान दिया गया है। गुरु की इसी महत्ता, वंदना और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पावन पर्व है गुरु पूर्णिमा। यह पावन उत्सव प्रतिवर्ष आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पूरे देश में अपार श्रद्धा, उल्लास और भक्ति के साथ मनाया जाता है।