श्रावण मास भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र महीना माना गया है। शिवपुराण और अन्य धर्मग्रंथों में इस मास का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि सावन में श्रद्धापूर्वक की गई पूजा, जप, तप, व्रत और सेवा साधक के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। इस पावन काल में भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें सुख, शांति, आरोग्य और मंगलमय जीवन का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
श्रावण मास में प्रतिदिन या प्रत्येक सोमवार शिवलिंग पर पवित्र जल, गंगाजल, दूध एवं बिल्वपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जप मन को पवित्र करता है तथा भगवान शिव की कृपा प्राप्त कराने वाला माना गया है।
किन्तु शास्त्रों में केवल पूजा ही नहीं, बल्कि करुणा, दया और सेवा को भी शिव आराधना का अभिन्न अंग बताया गया है। जो व्यक्ति भूखे को भोजन और पीड़ित की सहायता करता है, वह वास्तव में शिव की ही सेवा करता है। यही भाव भगवान शिव को सबसे अधिक प्रिय माना गया है।
सनातन परंपरा में अन्नदान को महादान कहा गया है, शास्त्रों में कहा गया है-
अन्नदानं परं दानं
अर्थात् सभी दानों में अन्नदान सर्वोत्तम है। मान्यता है कि सावन में श्रद्धापूर्वक किया गया अन्नदान अनेक गुना पुण्यफल प्रदान करता है और भगवान शिव की विशेष कृपा का कारण बनता है।
नारायण सेवा संस्थान के सेवायज्ञ में सहभागी बनें
श्रावण मास में नारायण सेवा संस्थान दिव्यांग एवं जरूरतमंद बच्चों के लिए निःशुल्क भोजन सेवा का पावन सेवा प्रकल्प चला रहा है।
इस सावन जलाभिषेक के साथ ही अन्न दान का भी संकल्प लें। दिव्यांग एवं जरूरतमंद बच्चों को भोजन कराकर भगवान भोलेनाथ की सच्ची आराधना करें और सेवा, दया तथा दान के माध्यम से अपने जीवन को सार्थक बनाएं।
श्रावण मास में करें सहयोग और पाएं शिव का आशीर्वाद
वर्ष में एक दिन 50 दिव्यांग एवं निर्धन बच्चों हेतु दोनों समय का भोजन सहयोग
वर्ष में एक दिन 50 दिव्यांग एवं निर्धन बच्चों हेतु एक समय का भोजन सहयोग
एक बार 100 दीन-हीन, असहाय, दिव्यांग बच्चों के लिए भोजन सहयोग
श्रावण माह में दीन-हीन, असहाय, दिव्यांग बच्चों हेतु सामान्य सहयोग