श्रावण मास सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र, पुण्यदायी और देवाधिदेव भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। यह मास भक्ति, व्रत, जप, अभिषेक, दान और सेवा का श्रेष्ठ काल माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पावन महीने में श्रद्धा और समर्पण से किया गया हर सत्कर्म अनेक गुना पुण्य फल प्रदान करता है।
श्रावण मास भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का पावन अवसर है। इस दौरान भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, बिल्वपत्र अर्पित करते हैं और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं। साथ ही यह महीना सेवा और परोपकार के माध्यम से पुण्य अर्जित करने का भी सर्वोत्तम समय माना गया है। यह मास मानव सेवा के माध्यम से शिव कृपा प्राप्त करने का दिव्य अवसर है।
भक्तगण सावन के हर सोमवार को उपवास रखें। मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करें। पूरे मन के साथ भगवान शिव का रुद्राभिषेक कराएं और दीन-दु:खी, असहाय, निर्धन और जरुरतमन्द लोगों की सहयता कर भगवान शिव का असीम आशीर्वाद प्राप्त करें।
धर्मग्रंथों में श्रावण मास को साधना और सेवा का विशेष समय बताया गया है। इस महीने में भगवान भोलेनाथ की आराधना के साथ अन्नदान और जरूरतमंदों की सहायता करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस मास में किया गया दान साधक के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि लेकर आता है।
श्रावण मास में करें सहयोग और पाएं शिव का आशीर्वाद
वर्ष में एक दिन 50 दिव्यांग एवं निर्धन बच्चों हेतु दोनों समय का भोजन सहयोग
वर्ष में एक दिन 50 दिव्यांग एवं निर्धन बच्चों हेतु एक समय का भोजन सहयोग
एक बार 100 दीन-हीन, असहाय, दिव्यांग बच्चों के लिए भोजन सहयोग
श्रावण माह में दीन-हीन, असहाय, दिव्यांग बच्चों हेतु सामान्य सहयोग