11 August 2026

सूर्य ग्रहण 2026: साल का आखिरी ग्रहण, जानिए तिथि, समय और धार्मिक महत्व

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सनातन परंपरा में आकाश में घटित होने वाली प्रत्येक खगोलीय घटना को केवल वैज्ञानिक दृष्टि से नहीं देखा जाता, बल्कि उसके साथ आध्यात्मिक और धार्मिक भावनाएं भी जुड़ी होती हैं। सूर्य और चंद्रमा को हिंदू धर्म में देवस्वरूप माना गया है। ऐसे में जब सूर्य अथवा चंद्रमा पर ग्रहण लगता है, तो इस अवधि को साधना, आत्मचिंतन, मंत्र जाप और पुण्य कर्मों के लिए विशेष माना जाता है।

वर्ष 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण भी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण संयोग लेकर आ रहा है। यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात को लगेगा। खास बात यह है कि यह ग्रहण हरियाली अमावस्या के अवसर पर पड़ रहा है। हालांकि भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इसे लेकर लोगों में काफी उत्सुकता बनी हुई है।

 

सूर्य ग्रहण कब लगेगा?

पंचांग के अनुसार इस वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात्रि में शुरू होगा। भारतीय समय के मुताबिक ग्रहण की शुरुआत रात 9 बजकर 4 मिनट पर होगी और इसका समापन 13 अगस्त की रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगा। इस बार के सूर्य ग्रहण की कुल अवधि लगभग 4 घंटे 23 मिनट रहेगी।

हरियाली अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण का यह संयोग इसे और विशेष बना रहा है। अमावस्या तिथि स्वयं ही सनातन धर्म में पूजा-पाठ, ध्यान, पितरों के स्मरण और दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में इस तिथि पर होने वाला ग्रहण धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों के लिए साधना का अवसर बन गया है।

 

भारत में नहीं दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

इस सूर्य ग्रहण को भारत की धरती से प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा। ग्रहण भारत में दृश्य न होने के कारण यहां इसके अनुसार धार्मिक नियमों का पालन करना अनिवार्य नहीं माना जाएगा।

विशेष रूप से सूतक काल को लेकर भी लोगों के मन में कई प्रश्न रहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक की मान्यता मुख्यतः उस स्थान पर मानी जाती है, जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि इस बार सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका अर्थ यह है कि भारत में सामान्य दैनिक कार्य, पूजा-पाठ और भोजन आदि पर ग्रहण के कारण किसी प्रकार की बाध्यता नहीं रहेगी।

 

ग्रहण काल में क्यों किया जाता है मंत्र जाप?

सनातन धर्म में ग्रहण काल को साधना के लिए विशेष समय माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में मन को सांसारिक गतिविधियों से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाने से आध्यात्मिक एकाग्रता बढ़ती है। ग्रहण के दौरान श्रद्धालु अपने इष्टदेव का स्मरण कर सकते हैं। सूर्यदेव की आराधना करने वाले साधक सूर्य मंत्र का जाप भी कर सकते हैं-

ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।

 

ग्रहण के दौरान किन कार्यों को शुभ माना जाता है?

ग्रहण के दौरान भगवान का स्मरण, मंत्र जाप, ध्यान और आध्यात्मिक ग्रंथों का पाठ किया जाता है। मन में सकारात्मक विचार रखते हुए मौन साधना करना भी आत्मिक शांति का माध्यम बन सकता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद श्रद्धालु स्नान जरूर करें। इसके पश्चात जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र, अन्न अथवा अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है।

 

ग्रहण में क्या नहीं करना चाहिए?

ग्रहण से जुड़े नियम स्थान और धार्मिक परंपराओं के अनुसार अलग-अलग होते हैं। जहां ग्रहण दिखाई देता है, वहां पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में भोजन करने, भोजन पकाने और अन्य दैनिक कार्यों से परहेज किया जाता है। 

 

आत्मचिंतन का अवसर है यह दिन

सनातन परंपरा का मूल संदेश व्यक्ति को अपने भीतर झांकने, ईश्वर का स्मरण करने और जीवन को सत्कर्मों की ओर ले जाने का है। इसलिए 12 अगस्त का यह अवसर उन लोगों के लिए आत्मचिंतन का माध्यम बन सकता है, जो आध्यात्मिक साधना में विश्वास रखते हैं। कुछ समय भगवान के ध्यान में बिताना, अपने भीतर के नकारात्मक विचारों को दूर करना और जरूरतमंदों की सेवा करना इस दिन को सार्थक बना सकता है।

साल का अंतिम सूर्य ग्रहण भारत में भले ही दिखाई न दे, लेकिन श्रावण मास में पड़ने वाली हरियाली अमावस्या के साथ बना यह संयोग धार्मिक आस्था रखने वालों के लिए विशेष अवसर अवश्य है। ग्रहण के प्रति भय रखने के बजाय इसे आत्मसंयम, ईश्वर स्मरण, सेवा और सद्कर्मों के अवसर के रूप में देखना अधिक सार्थक है। ईश्वर का स्मरण, जरूरतमंदों की सेवा और मन में सकारात्मक भाव यही किसी भी धार्मिक अवसर की सबसे बड़ी सार्थकता है।

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