श्रावण मास भगवान शिव की भक्ति और आराधना का महीना माना जाता है। पूरे सावन में शिवभक्त जलाभिषेक, मंत्रजाप, व्रत और पूजा के माध्यम से भोलेनाथ की आराधना करते हैं। इसी पावन मास के समापन पर आने वाली श्रावण पूर्णिमा भक्ति, आस्था, पारिवारिक प्रेम और सेवा-भाव को एक साथ जोड़ने वाला विशेष पर्व है।
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। साथ ही देशभर में रक्षाबंधन का पावन पर्व भी मनाया जाता है। भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के संकल्प से जुड़ा यह पर्व श्रावण पूर्णिमा को और भी भावपूर्ण बना देता है। दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में इसी दिन नारयली पूर्णिमा के रूप में वरुण देव की आराधना की जाती है। धार्मिक दृष्टि से श्रावण पूर्णिमा जीवन में श्रद्धा, प्रेम, दान और सेवा के भाव को जागृत करने का अवसर है।
द्रिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को प्रातः 9:08 बजे प्रारंभ होगी और 28 अगस्त 2026 को प्रातः 9:48 बजे समाप्त होगी। हिन्दू धर्म में उदया तिथि की मान्यता है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार श्रावण पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी।
श्रावण पूर्णिमा सावन के उस आध्यात्मिक वातावरण को पूर्णता प्रदान करती है, जिसमें भक्त पूरे महीने भगवान शिव की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करने से भक्त के जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता का संचार होता है।
भगवान शिव को आशुतोष कहा गया है; अर्थात जो थोड़ी-सी सच्ची श्रद्धा से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए शिव आराधना में आडंबर से अधिक महत्व भाव का है। एक लोटा जल, कुछ बेलपत्र और सच्चे मन से किया गया स्मरण भी भोलेनाथ के चरणों में श्रद्धा अर्पित करने का सुंदर माध्यम है। इस दिन भक्त शिव चालीसा, रुद्राष्टक, महामृत्युंजय मंत्र या पंचाक्षरी मंत्र का जाप करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंत्रजाप और ध्यान मन को स्थिर करते हैं तथा व्यक्ति को ईश्वर के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा देते हैं।
श्रावण पूर्णिमा का एक प्रमुख आकर्षण रक्षाबंधन भी है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनके सुखी, स्वस्थ एवं मंगलमय जीवन की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेते हैं।
रक्षाबंधन प्रेम, विश्वास और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर है। यही कारण है कि श्रावण पूर्णिमा पर आध्यात्मिक भक्ति के साथ पारिवारिक स्नेह का भी संगम देखने को मिलता है।
सनातन संस्कृति में दान को धर्म और पुण्य का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। दान का अर्थ केवल धन देना नहीं, बल्कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद के काम आना भी है। अन्नदान, वस्त्रदान, शिक्षा में सहयोग और असहाय की सहायता जैसे कार्य सेवा के श्रेष्ठ रूप माने जाते हैं।
श्रीमद् भगवत गीत में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं
यज्ञदानतपः कर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत्।
अर्थात यज्ञ, दान और तप जैसे कर्म त्यागने योग्य नहीं हैं; इनका आचरण करना चाहिए।
इसी भाव को हमारे संतों ने भी जीवन में उतारने की प्रेरणा दी है। जब पूजा के साथ हमारे भीतर करुणा जागती है और किसी जरूरतमंद के जीवन में सहायता का माध्यम बनते हैं, तभी हमारी भक्ति सेवा का रूप लेती है। श्रावण पूर्णिमा पर अन्नदान को विशेष पुण्यकारी माना जाता है। किसी भूखे को भोजन कराना केवल उसके शरीर की आवश्यकता पूरी करना नहीं, बल्कि उसके जीवन में सम्मान और अपनत्व का भाव जगाना भी है।
श्रावण पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर आप अपनी श्रद्धा को सेवा से जोड़ें। नारायण सेवा संस्थान द्वारा दीन-हीन, असहाय, निर्धन और दिव्यांग बच्चों के लिए भोजन सेवा का प्रकल्प चलाया जा रहा है। आप भी इस पुण्यदायी अवसर पर अन्न सेवा में अपना सहयोग देकर किसी जरूरतमंद बच्चे की थाली तक भोजन पहुंचाने में सहभागी बनें। आपकी छोटी-सी सहायता किसी के लिए अपनत्व और करुणा का अनुभव बन सकती है।
कहा जाता है कि भगवान की पूजा में चढ़ाया गया प्रसाद कुछ लोगों तक पहुंचता है, लेकिन सेवा के रूप में दिया गया अन्न किसी जरूरतमंद के जीवन में सीधे खुशियां लेकर आता है।
श्रावण पूर्णिमा हमें जीवन के कई सुंदर मूल्यों से जोड़ती है भगवान शिव के प्रति भक्ति, माता-पिता और परिवार के प्रति सम्मान, भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और समाज के प्रति सेवा का भाव।
आइए इस श्रावण पूर्णिमा में किसी जरूरतमंद के जीवन में भी खुशियों का दीप जलाएं। भगवान शिव के चरणों में श्रद्धा अर्पित करें, रक्षाबंधन के पवित्र रिश्ते को प्रेम से निभाएं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान एवं सेवा का संकल्प लें।
प्रश्न: श्रावण (सावन ) पूर्णिमा 2026 कब मनाई जाएगी?
उत्तर: श्रावण पूर्णिमा 28 अगस्त को मनाई जाएगी।
प्रश्न: क्या श्रावण पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन मनाया जाता है?
उत्तर: हां, श्रावण पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुखी और मंगलमय जीवन की कामना करती हैं।
प्रश्न: श्रावण पूर्णिमा पर क्या दान करना चाहिए?
उत्तर: इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन और अन्न का दान किया जा सकता है।