सनातन धर्म में प्रत्येक मास, तिथि और पर्व का अपना विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है। इन्हीं पावन अवसरों में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आने वाली निर्जला एकादशी अत्यंत पुण्यदायी और मंगलकारी मानी जाती है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा को कई स्थानों पर वट पूर्णिमा अथवा वट सावित्री पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं तथा वट वृक्ष की पूजा करती हैं। धार्मिक ग्रंथों में वट वृक्ष को देवों का स्वरूप माना गया है, इसलिए इसकी पूजा अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है।
ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 2026 एक दुर्लभ और अत्यंत पुण्यदायी अवसर है, जो सोमवती अमावस्या के दिन पड़ रहा है। जानें इसकी तिथि, धार्मिक महत्व, पूजा-विधि तथा पुरुषोत्तम मास में दान, अन्न सेवा और भगवान विष्णु की उपासना का महत्व।