23 October 2026

दीपावली 2026: जानें तिथि, लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त और आध्यात्मिक महत्व

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कार्तिक मास की अमावस्या की रात्रि, जब घर-आँगन में दीपों की पंक्तियाँ सजती हैं और वातावरण भक्ति एवं उल्लास से भर उठता है, तब दीपावली का पावन पर्व जीवन में नई आशा और मंगल का संदेश लेकर आता है। यह उत्सव अपने अंतर्मन को प्रकाशित करने, सद्कर्मों की ओर बढ़ने और जीवन में धर्म, करुणा एवं सद्भाव को स्थान देने का पर्व है।

सनातन परंपरा में दीपावली को सुख-समृद्धि, शुभता और आध्यात्मिक जागरण से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन भक्त माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना करते हैं तथा परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं। साथ ही, जरूरतमंदों के जीवन में प्रसन्नता लाने और सेवा के माध्यम से पर्व की सार्थकता बढ़ाने का संकल्प भी लेते हैं।

 

दीपावली 2026 कब है? 

दीपावली हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। इस तिथि पर प्रदोष काल में दीपदान और माता लक्ष्मी के पूजन का विधान है। द्रिक पंचांग में उपलब्ध गणना के अनुसार, दीपावली 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 8 नवंबर को प्रातः 11 बजकर 27 मिनट पर आरंभ होकर 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहने का उल्लेख है।

 

लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त

दीपावली की संध्या माता महालक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। माता लक्ष्मी धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी हैं, जबकि भगवान गणेश विघ्नों का निवारण करने वाले और शुभ कार्यों के आरंभ में पूजनीय हैं। इसलिए दीपावली पर दोनों की संयुक्त पूजा करने की परंपरा है।

पंचांग के अनुसार, 8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजन का शुभ समय शाम 5 बजकर 54 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक है। इस अवधि में श्रद्धालु विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर परिवार के सुख, शांति और मंगल की कामना करें। 

पूजन के समय घर के वातावरण को शांत और पवित्र रखें। पूजा के समय श्रद्धा, कृतज्ञता और निर्मल मन बनाए रखें। अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय एवं विधि निर्धारित करें।

 

दीपावली का आध्यात्मिक महत्व

दीपावली का वास्तविक संदेश अपने अंतर्मन को सद्गुणों से प्रकाशित करना है। घरों में प्रदीप्त हो रही दीपक की छोटी-सी लौ यह स्मरण कराती है कि अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, प्रकाश की एक किरण उसे दूर करने का सामर्थ्य रखती है। इसी प्रकार जीवन में सत्य, विवेक और सदाचार का अनुसरण करके अज्ञान, ईर्ष्या, क्रोध और अहंकार जैसे दोषों पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

सनातन की दिव्य परंपरा में दीपावली को धर्म, शुभता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस त्यौहार पर लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, मंदिरों को सजाते हैं, दीप प्रज्वलित करते हैं और आराध्य देवी-देवताओं का स्मरण करते हैं। यह अवसर परिवार के सदस्यों के साथ प्रेम बाँटने, पुराने मतभेद दूर करने और संबंधों में मधुरता लाने की प्रेरणा भी देता है।

 

दीपावली से जुड़ी पौराणिक मान्यताएँ

दीपावली से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध मान्यताओं में भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी का प्रसंग प्रमुख है। मान्यता है कि चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण करने और रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की प्रसन्नता में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था।

 

दीपावली का इतिहास और प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख

दीपावली की परंपरा भारतीय संस्कृति में लंबे समय से चली आ रही है। प्राचीन साहित्य, धार्मिक ग्रंथों और ऐतिहासिक रचनाओं में दीपोत्सव तथा दीपमालिका जैसे उत्सवों का उल्लेख मिलता है। पद्म पुराण और स्कन्द पुराण में भी दीपावली से जुड़ी परंपराओं और दीपों के महत्व का वर्णन मिलता है।

दीपक भारतीय संस्कृति में ज्ञान, पवित्रता और मंगल का प्रतीक है। दीप प्रज्वलित करते समय मनुष्य अपने जीवन में विवेक और सद्बुद्धि के प्रकाश की कामना करता है। यही कारण है कि पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक अवसरों पर दीप जलाने की परंपरा आज भी प्रचलित है।

दीपावली का उत्सव भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग लोक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के साथ मनाया जाता है। कहीं इसे भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी से जोड़ा जाता है, तो कहीं माता लक्ष्मी की आराधना, व्यापारिक नववर्ष और अन्य स्थानीय धार्मिक परंपराओं को विशेष महत्व दिया जाता है। इन विविधताओं के बावजूद दीपावली का मूल भाव प्रकाश, मंगल और सद्भाव ही है।

 

दीपावली पाँच पर्वों का उत्सव है 

दीपावली के साथ कई अन्य पर्व भी जुड़े हुए हैं। जो दीपावली के साथ ही मनाए जाते हैं। इसलिए इन्हें दीपावली में ही समाहित माना जाता है। ये पर्व पाँच से लेकर छः दिनों तक चलते हैं। 

 

धनतेरस: दीपावली से पहले मनाया जाने वाला यह पर्व धन, आरोग्य और शुभता की कामना से जुड़ा है। इस दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। कई परिवार परंपरा के अनुसार नए बर्तन या अन्य उपयोगी वस्तुएँ खरीदते हैं।

नरक चतुर्दशी: इसे छोटी दीपावली भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में यह पर्व बुराई पर विजय और जीवन से नकारात्मकता दूर करने का संदेश देता है। साथ ही सजने संवरने और अच्छी जीवन शैली की प्रतीक है।  

दीपावली: मुख्य पर्व पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और परिवार के आराध्य देवों का पूजन किया जाता है। घरों, मंदिरों और आँगन में दीप जलाकर मंगल की कामना की जाती है।

गोवर्धन पूजा: इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा करने की कथा का स्मरण किया जाता है। यह प्रकृति, गौवंश और सामुदायिक जीवन के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है।

भाई दूज: यह पर्व भाई-बहन के स्नेह और पारिवारिक संबंधों की मधुरता का प्रतीक है। बहनें अपने भाइयों के मंगलमय जीवन की कामना करती हैं।

 

लक्ष्मी-गणेश पूजन की विधि

दीपावली के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान करें और घर तथा पूजा स्थल को स्वच्छ रखें। संध्या के समय एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएँ स्थापित करें। प्रतिमाओं की दिशा और स्थापना अपने परिवार की परंपरा अथवा पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार रखें।

इसके बाद दीप प्रज्वलित करके भगवान का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें। पूजा में पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप, दीप, फल, खीर, बताशे, लाई और मिठाई अर्पित करें। माता लक्ष्मी को श्रद्धापूर्वक पुष्प एवं नैवेद्य समर्पित करें और भगवान गणेश को दूर्वा तथा प्रिय भोग अर्पित करें।

इसके पश्चात लक्ष्मी-गणेश मंत्रों का जाप करें। लक्ष्मी चालीसा, श्री सूक्तम् अथवा परिवार में प्रचलित स्तुति का पाठ करें और आरती करें। पूजा पूर्ण होने पर प्रसाद वितरित करें तथा घर के द्वार, आँगन और पूजा स्थल पर दीप जलाएँ।

ध्यान रखें कि पूजा की विधि परिवारों और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है। इसलिए अपनी परंपरा के अनुरूप श्रद्धापूर्वक पूजन करना उचित है।

 

दीपावली पर प्रार्थना 

दीपावली के अवसर पर प्रार्थना और मंत्रों का स्मरण मन को एकाग्र करने तथा जीवन में सकारात्मक दृष्टि विकसित करने का माध्यम है। बृहदारण्यक उपनिषद् का यह प्रसिद्ध मंत्र प्रकाश और आत्मज्ञान की भावना को सुंदर रूप में व्यक्त करता है।

 

असतो मा सद्गमय।

तमसो मा ज्योतिर्गमय।

मृत्योर्मा अमृतं गमय।

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

 

भावार्थ: हे प्रभु! हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु से अमृतत्व की ओर ले चलें।

यह प्रार्थना दीपावली के आध्यात्मिक संदेश से गहराई से जुड़ी है। यह हमें बाहरी प्रकाश के साथ-साथ अपने विचारों और कर्मों में भी ज्ञान, सत्य तथा सदाचार का प्रकाश लाने की प्रेरणा देती है।

 

दीपावली पर दान और सेवा का महत्व

दीपावली का आनंद तब और अधिक सार्थक हो जाता है, जब हमारी खुशियों में जरूरतमंदों का भी स्थान हो। सनातन परंपरा में दान, करुणा और परोपकार को महत्वपूर्ण सद्गुण माना गया है। पर्व के अवसर पर किसी जरूरतमंद परिवार को भोजन उपलब्ध कराना, उत्सव की सामग्री भेंट करना, असहाय व्यक्ति की सहायता करना या किसी वंचित बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाना भी सेवा का पुण्यकारी माध्यम है।

इसी भावना के साथ इस दीपावली नारायण सेवा संस्थान के ‘हर घर खुशियों की दिवाली’ सेवा प्रकल्प संचालित कर रहा है; जिसके अंतर्गत जरूरतमंद लोगों को ‘गिफ्ट बॉक्स’ वितरित किये जा रहे हैं। हर बॉक्स में पूजा की सामग्री, पटाखे, वस्त्र और मिठाई होगी। कृपया, अपने सहयोग से दीन-हीन, असहाय और जरूरतमंद लोगों की दीवाली रोशन करें। आपका सेवाभाव किसी परिवार के लिए उत्सव का कारण बन सकता है और किसी जरूरतमंद के जीवन में आशा का नया प्रकाश जगा सकता है।

 

दीपावली पर लें सद्कर्मों का संकल्प

दीपावली हृदय में भक्ति, विचारों में पवित्रता और कर्मों में परोपकार का प्रकाश जगाने का अवसर है। माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना करते हुए हम यह संकल्प लें कि अपने जीवन में सत्य, सदाचार, विनम्रता और करुणा को स्थान देंगे। इस दीपावली अपने परिवार के साथ प्रेम बाँटें, प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाएँ, जरूरतमंदों की सहायता करें और उत्सव को उल्लासपूर्ण ढंग से मनाएँ। दीपों की ज्योति हमें हर दिन यह स्मरण कराती रहे कि सच्चा प्रकाश वही है, जो हमारे भीतर के अज्ञान को दूर करे और दूसरों के जीवन में भी आशा जगाए।

माता महालक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, सद्बुद्धि और मंगल का वास हो। हर घर में प्रेम का दीप जले और हर हृदय सेवा एवं सद्भाव से आलोकित हो।

 

आप सभी को दीपावली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ।

 

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: दीपावली 2026 कब मनाई जाएगी?

उत्तर: दीपावली का पर्व 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।

प्रश्न: दीपावली 2026 में लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?

उत्तर: पंचांग के अनुसार, 8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक है। 

प्रश्न: दीपावली पर दीप क्यों जलाए जाते हैं?

उत्तर: दीप प्रज्वलित करना प्रकाश, ज्ञान, शुभता और आशा का प्रतीक है। साथ ही यह परंपरा भगवान राम के अयोध्या वापस आने के उपलक्ष्य में मनाई जाती है।  

प्रश्न: नारायण सेवा संस्थान के ‘हर घर खुशियों की दिवाली’ सेवा प्रकल्प से कैसे जुड़ें?

उत्तर: ‘हर घर खुशियों की दिवाली’ सेवा प्रकल्प में सहयोग देने के लिए नारायण सेवा संस्थान की सेबसाइट पर सहयोग दे सकते हैं।

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