भारत हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाता है। यह भारतीय लोकतंत्र की आत्मा का उत्सव है। यह वह ऐतिहासिक दिन है जब भारत ने स्वयं को संविधान के माध्यम से परिभाषित किया और एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में विश्व मंच पर अपनी पहचान स्थापित की। इस वर्ष हम […]
माघ पूर्णिमा 2026, 1 फरवरी (रविवार) को है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, भगवान विष्णु-लक्ष्मी की पूजा और दान से पाप नष्ट होते हैं तथा मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। प्रयागराज में माघ स्नान का समापन इस शुभ तिथि पर होता है।
ज्ञान, कला और संगीत की देवी माँ सरस्वती को समर्पित वसंत पंचमी का पर्व 2026 में 23 जनवरी को मनाया जाएगा। यह लेख इस अबूझ मुहूर्त के आध्यात्मिक महत्व और प्रकृति के उत्सव पर प्रकाश डालता है।
प्रत्येक एकादशी अपने भीतर एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा समेटे होती है, परंतु जया एकादशी को सभी एकादशियों में विशेष फलदायी माना गया है।
सृष्टि के संहार और सृजन के अधिपति, करुणा और तप के साकार स्वरूप भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि बस आने ही वाला है। यह केवल एक व्रत या अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति और शिवत्व को पाने का शुभ अवसर है।
“14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ खरमास तो समाप्त हो रहा है, लेकिन विवाह की शहनाइयों के लिए अभी और इंतजार करना होगा। आखिर सूर्य के उत्तरायण होने के बावजूद शुभ कार्यों पर रोक क्यों लगी रहेगी? जानें शुक्र अस्त का ज्योतिषीय प्रभाव और फरवरी 2026 में शुभ मुहूर्त की सटीक तारीख।”
कल्पवास माघ मास में प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर किया जाने वाला एक दिव्य साधना-व्रत है। सनातन परंपरा में यह संयम, तप, पवित्र स्नान और भक्ति के माध्यम से आत्मशुद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
मौनी अमावस्या 2026: 18 जनवरी को माघ मास की यह अमावस्या आत्मशुद्धि और पितृ कल्याण का अनुपम अवसर प्रदान करती है। ब्रह्म मुहूर्त स्नान, मौन व्रत एवं दान के महत्व सहित घर पर किए जा सकने वाले उपायों की पूरी जानकारी प्राप्त करें।
सनातन धर्म में षटतिला एकादशी अत्यंत पुण्यदायी व्रत है। वर्ष 2026 में 14 जनवरी को मनाई जाने वाली यह एकादशी तिल के छह उपयोगों – स्नान, उबटन, हवन, तर्पण, भोजन व दान – से दरिद्रता नाश और समृद्धि प्रदान करती है। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करें।
नव वर्ष 2026: जानें 1 जनवरी को नया साल क्यों मनाया जाता है – रोमन देवता जेनस, जूलियस सीजर और ग्रेगोरियन कैलेंडर का रहस्य। सकारात्मक संकल्प, अपनों के साथ समय और जरूरतमंदों की सेवा से करें 2026 की सार्थक शुरुआत!
नववर्ष की पूर्वसंध्या (31 दिसंबर) दुनिया भर में उत्साह, आतिशबाजी और नई उम्मीदों के साथ मनाया जाने वाला उत्सव है, जिसका इतिहास प्राचीन बेबीलोन से टाइम्स स्क्वायर बॉल ड्रॉप तक फैला है।
पौष पूर्णिमा, जिसे शाकम्भरी पूर्णिमा भी कहते हैं, पवित्र स्नान और दान-पुण्य के लिए विशेष महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन शाकम्भरी देवी व भगवान विष्णु की पूजा, अन्न दान और चंद्रमा को अर्घ्य देने से आत्मिक शुद्धि, समृद्धि एवं पुण्य की प्राप्ति होती है।