@narayansevasansthan पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिक मास भी कहा जाता है, सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र, दुर्लभ और पुण्यदायी मास है। शास्त्रों के अनुसार जब सूर्य और चंद्र मास की गणना में अंतर उत्पन्न हुआ, तब संतुलन हेतु एक अतिरिक्त मास प्रकट हुआ। प्रारंभ में उपेक्षित होने के कारण इसे 'मलमास' कहा गया, लेकिन भगवान श्रीहरि विष्णु ने इसे अपना स्वरूप और नाम प्रदान कर 'पुरुषोत्तम मास' के रूप में सर्वोच्च स्थान दिया। तभी से यह मास भगवान विष्णु को समर्पित होकर भक्ति, सेवा और साधना का श्रेष्ठ काल माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास में जप-तप, कथा श्रवण, भजन-कीर्तन, दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सेवा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का संचार होता है।
इस पुण्यमयी मास के शुभ कालखंड में भगवान श्रीहरि की भक्ति और मानव सेवा के इस दिव्य पर्व से जुड़कर अपने जीवन को पुण्य और सकारात्मक ऊर्जा से आलोकित करें।
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