रक्षाबंधन मात्र एक पर्व नहीं, अपितु एक ऐसी भावना है जो भाई-बहन के पवित्र संबंध को आत्मिक स्तर पर जोड़ती है। यह त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और हिन्दू धर्म में इसका विशेष महत्व है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करती हैं, वहीं भाई बहन की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं।
रक्षाबंधन का संदेश केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं है। यह पर्व उस आध्यात्मिक भावना को भी प्रकट करता है, जिसमें एक व्यक्ति दूसरे की रक्षा, सम्मान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध होता है। धर्म, इतिहास और पुराणों में इसके कई प्रेरणादायक प्रसंग मिलते हैं, जो इस पर्व की गहराई और महानता को दर्शाते हैं।
रक्षाबंधन का त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार की श्रावण मास की पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 8 अगस्त की दोपहर 2:12 मिनट पर शुरू होगा और इसका समापन 9 अगस्त को दोपहर 1:24 मिनट पर होगा। अतः उदयातिथि के अनुसार रक्षाबंधन का त्यौहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन प्रातः काल से लेकर दोपहर 1:24 मिनट तक राखी बांधना शुभ रहेगा।
‘रक्षाबंधन’ शब्द स्वयं ही बहुत कुछ कहता है—‘रक्षा का बंधन’। यह केवल भौतिक रक्षा नहीं, बल्कि आत्मिक सुरक्षा का भी संकेत देता है। ऋग्वेद के मंत्रों में भी ‘रक्षासूत्र’ का उल्लेख आता है, जो यज्ञ या अनुष्ठान के दौरान व्यक्ति की रक्षा के लिए बांधा जाता था। इसका अर्थ है कि यह परंपरा केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक भी है।
श्रीमद्भागवत महापुराण में एक प्रसंग आता है कि जब भगवान वामनदेव ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगकर उसका सारा साम्राज्य ले लिया, तब बलि ने भक्तिभाव से उन्हें अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें पाताल लोक का स्वामी बना दिया, लेकिन शर्त रखी कि वे सदैव उनके समीप रहेंगे। लक्ष्मी जी इस बात से चिंतित हो गईं और वामनदेव (भगवान विष्णु) को पाताल से वापस लाने के लिए राजा बलि को भाई मानते हुए उसकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा। बलि प्रसन्न होकर उन्हें अपने भाई की तरह सम्मान देते हुए भगवान विष्णु को वापस बैकुंठ ले जाने की अनुमति दे देते हैं।
यह प्रसंग दर्शाता है कि रक्षाबंधन केवल रक्त संबंधों तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव भी समाहित है।
आज जब सामाजिक ताने-बाने में आत्मीयता की डोर धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है, तब रक्षाबंधन जैसे त्यौहार एक अवसर हैं; परिवार को जोड़ने, रिश्तों को संजोने और हृदय से हृदय को जोड़ने का। भाई-बहन के रिश्ते में तकरार हो सकती है, विचारों में भिन्नता हो सकती है, परंतु रक्षाबंधन पर जब बहन अपने भाई की कलाई पर प्रेम की डोर बांधती है, तब हर दूरी मिट जाती है।
राखी केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली रक्षा-सूत्र होती है। जब इसे सच्चे मन से, शुभ मंत्रों के साथ भाई की कलाई पर बांधा जाता है, तो यह एक आध्यात्मिक सुरक्षा कवच का काम करता है। यदि इसे धार्मिक परंपराओं के अनुसार तैयार और प्रयोग किया जाए, तो इसका प्रभाव और भी अधिक गहरा हो जाता है।
तो चलिए जानते हैं कि रक्षाबंधन पर बहनों को भाइयों की कलाई पर किस तरह की राखी बांधनी चाहिए।
धार्मिक ग्रंथों में यह उल्लेखित है कि लाल और पीले रंग की मोली (सूती पवित्र धागा) से बनी राखी सबसे शुद्ध और शुभ मानी जाती है। इसे भगवान विष्णु और गणेश को अर्पित करने के बाद, भाई की कलाई पर वैदिक मंत्रों के साथ बांधना चाहिए। इससे न केवल भाई की रक्षा होती है, बल्कि परिवार में सुख-शांति भी बनी रहती है।
त्रिशूल, ओम, स्वास्तिक जैसे शुभ चिन्हों से सजी राखियां भी विशेष ऊर्जा का संचार करती हैं। ये प्रतीक हमारे धार्मिक संस्कारों से जुड़े हुए हैं और इन्हें रक्षा-सूत्र में शामिल करने से भाई के जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक बल बढ़ता है। उचित मंत्रों के उच्चारण के साथ ऐसी राखी बांधने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।
अगर आप अपने भाई के जीवन में आध्यात्मिक उत्थान और ईश कृपा की कामना करती हैं, तो रुद्राक्ष या तुलसी से बनी राखी एक उत्तम विकल्प है। रुद्राक्ष से शिवजी की कृपा बनी रहती है, जो ग्रहदोषों से सुरक्षा प्रदान करती है। वहीं, तुलसी भगवान विष्णु और लक्ष्मी की प्रतीक है, जिससे भाई के जीवन में सुख, वैभव और शांति बनी रहती है।
राखी बांधते समय मंत्र उच्चारित करें-
येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामपि बध्नामि, रक्षे माचल माचल॥
अर्थात जिस धागे से महान शक्तिशाली दानवेंद्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी धागे से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षासूत्र! तुम स्थिर रहना, स्थिर रहना।
यह मंत्र अदृश्य नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है और भाई को जीवन में सफलता प्रदान करता है।
प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का यह त्यौहार हर भारतीय के दिल में अपनेपन की लौ जलाता है। जब एक बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तो वह केवल एक धागा नहीं, एक आशीर्वाद, एक विश्वास और एक धर्म को बांधती है।
आइए, इस रक्षाबंधन हम केवल अपने परिवार तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति की रक्षा का व्रत लें, जिसे हमारी आवश्यकता है। यही सच्चा बंधन है।
आप सभी को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं ।