02 February 2026

विजया एकादशी 2026 (Vijaya Ekadashi): तिथि, व्रत कथा, दान का महत्व एवं श्रीराम की विजय

Start Chat

सनातन धर्म में एकादशी व्रत को भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन माना गया है। वर्ष भर में आने वाली 24 एकादशियों में प्रत्येक का अपना अलग आध्यात्मिक महत्व है, किंतु फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली विजया एकादशी विशेष फलदायी मानी गई है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी जीवन में विजय, सफलता दिलाने वाली हैं और बाधाओं से मुक्ति प्रदान करने वाली है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक विजया एकादशी का व्रत करता है, उसे जीवन के समस्त संघर्षों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

 

विजया एकादशी 2026 की तिथि एवं शुभ मुहूर्त (Vijaya Ekadashi Date & Subh Muhurat)

वर्ष 2026 में विजया एकादशी 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि का आरंभ 12 फरवरी 2026 को रात्रि 12 बजकर 22 मिनट से होगा और इसका समापन 13 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 55 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म में उदयातिथि को मान्यता होने के कारण विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा।

व्रत पारण अगले दिन 14 फरवरी 2026 को प्रातः 7:23 बजे से 9:21 बजे के मध्य किया जाएगा।

 

विजया एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व (Spritiual Significance of Vijaya Ekadashi)

विजया एकादशी का व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला माना गया है। यह व्रत न केवल वर्तमान जन्म, बल्कि पूर्व जन्मों के पापों से भी मुक्ति दिलाने वाला है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस एकादशी के प्रभाव से साधक को धर्म, अर्थ, काम और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मान्यता है कि जीवन में बार-बार आने वाली असफलता, शत्रु बाधा, मानसिक कष्ट और भय से मुक्ति पाने के लिए विजया एकादशी का व्रत अत्यंत प्रभावशाली होता है।

 

विजया एकादशी की पूजा विधि (Vijaya Ekadashi Pooja Vidhi)

विजया एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ, पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थल में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें तुलसी दल, पीले पुष्प, फल, दीपक, धूप और चंदन अर्पित करें। विधि-विधान से पूजा कर विजया एकादशी व्रत कथा का श्रवण करें और अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।

 

इस दिन ब्राह्मणों, साधुओं तथा दीन-हीन, असहाय लोगों को दान-दक्षिणा देना विशेष पुण्यदायी माना गया है।

 

पुराणों में विजया एकादशी की महिमा

विजया एकादशी का वर्णन पद्म पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पूर्व विजया एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से ही उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन व्रत करने से स्वर्णदान, भूमिदान, अन्नदान और गौदान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। साथ ही, यह व्रत ‘वाजपेय यज्ञ’ के समान पुण्य प्रदान करता है।

 

विजया एकादशी व्रत कथा (Vijaya Ekadashi Vrat Katha)

पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम माता सीता की मुक्ति के लिए लंका पर विजय प्राप्त करने हेतु समुद्र तट पर पहुँचे, तब उनके समक्ष अथाह सागर एक बड़ी बाधा बनकर खड़ा था। वानर सेना सहित समुद्र पार करना असंभव प्रतीत हो रहा था। तब श्रीराम ने समाधान हेतु महर्षि बकदाल्भ्य से मार्गदर्शन प्राप्त किया।

महर्षि ने बताया कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की ‘विजया एकादशी’ अत्यंत फलदायी है। यदि श्रद्धा और विधिपूर्वक इस व्रत का पालन किया जाए, तो सभी बाधाएँ दूर होकर विजय का मार्ग प्रशस्त होता है। ऋषि के वचनों को स्वीकार कर भगवान श्रीराम ने एकादशी का उपवास रखा, भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और पूर्ण श्रद्धा से व्रत संपन्न किया।

व्रत के प्रभाव से लंका जाने का मार्ग सुलभ हुआ। नल-नील द्वारा सेतु निर्माण संभव हुआ और अंततः धर्म की अधर्म पर विजय हुई। इसी पुण्य प्रभाव से श्रीराम ने रावण का वध कर सत्य और धर्म की स्थापना की।

 

 

विजया एकादशी व्रत के नियम

  • इस दिन परनिंदा, छल-कपट, क्रोध और द्वेष से दूर रहें।
  • चावल और भारी भोजन का सेवन न करें।
  • काले रंग के वस्त्र पहनने से बचें।
  • रात्रि में भगवान विष्णु के भजन, कीर्तन और नाम-स्मरण करें।
  • विजया एकादशी पर दान का विशेष महत्व

 

विजया एकादशी पर दान का विशेष महत्व 

सनातन धर्म में दान को कलियुग का सबसे बड़ा धर्म बताया गया है। विजया एकादशी जैसे पावन दिन पर किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है। अन्न, वस्त्र, धन और गौदान इस दिन विशेष रूप से पुण्यदायी माने गए हैं।

 

मनुस्मृति में कहा गया है—

 

तपः परं कृतयुगे त्रेतायां ज्ञानमुच्यते ।

द्वापरे यज्ञमेवाहुर्दानमेकं कलौ युगे ॥

 

सतयुग में तप, त्रेता में ज्ञान, द्वापर में यज्ञ और कलियुग में दान ही मनुष्य के कल्याण का मार्ग है।

 

विजया एकादशी पर क्या दान करें?

अन्न और भोजन दान : इस दिन निर्धन, असहाय और जरूरतमंद बच्चों को भोजन कराना सर्वोत्तम दान माना गया है। विजया एकादशी के पावन अवसर पर नारायण सेवा संस्थान के दिव्यांग एवं जरूरतमंद बच्चों को भोजन कराने के सेवा प्रकल्प में सहयोग कर पुण्य के भागी बनें। 

 

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

 

प्रश्न: विजया  एकादशी 2026 कब है?

उत्तर: साल 2026 में विजया एकादशी 13 फरवरी को मनाई जाएगी। 

 

प्रश्न: विजया एकादशी कौन से भगवान के लिए समर्पित है?

उत्तर: विजया एकादशी भगवान विष्णु के लिए समर्पित है। 

 

प्रश्न: विजया एकादशी पर किन चीजों का दान करना चाहिए?

उत्तर: विजया एकादशी पर जरूरतमंदों को अन्न और भोजन का दान करना चाहिए।

X
राशि = ₹