04 February 2026

फाल्गुन अमावस्या 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, सूर्य ग्रहण और दान–पुण्य का महत्व

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सनातन परंपरा में अमावस्या तिथि को अत्यंत पावन और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। यह तिथि आत्मचिंतन, साधना, पितृ स्मरण और दान–पुण्य का श्रेष्ठ अवसर प्रदान करती है। जब यही अमावस्या फाल्गुन मास में आती है, तो इसकी पुण्यता कई गुना बढ़ जाती है। फाल्गुन अमावस्या न केवल पितरों की शांति और पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि साधक के जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है। वर्ष 2026 में फाल्गुन अमावस्या का महत्व इसलिए और भी बढ़ गया  है, क्योंकि इसी दिन सूर्य ग्रहण का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है।

 

फाल्गुन अमावस्या 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 17 फरवरी 2026 (मंगलवार) को मनाई जाएगी।

अमावस्या तिथि का आरंभ 16 फरवरी को सायं 5:54 बजे से होगा और इसका समापन 17 फरवरी को सायं 5:30 बजे पर होगा। उदयातिथि के अनुसार फाल्गुन अमावस्या का व्रत, पूजन, तर्पण और दान 17 फरवरी को करना श्रेष्ठ माना गया है।

 

फाल्गुन अमावस्या का महत्व

फाल्गुन अमावस्या का विशेष संबंध पितृ तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान से माना गया है। जिन श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों की तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके लिए अमावस्या का दिन पितरों के निमित्त तर्पण करने का सर्वोत्तम अवसर होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से किया गया तर्पण पितरों को तृप्ति प्रदान करता है और उनके आशीर्वाद से परिवार में सुख–शांति और समृद्धि बनी रहती है।

यह अमावस्या महाशिवरात्रि के निकट आती है, इसलिए इसका संबंध भगवान शिव की साधना से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से साधक के पापों का नाश होता है और जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं।

फाल्गुन अमावस्या के अवसर पर देशभर के प्रमुख तीर्थस्थलों में विशेष स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है। विशेष रूप से प्रयागराज के त्रिवेणी संगम, गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

 

सूर्य ग्रहण कब है?

वर्ष 2026 में 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लगेगा। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसकी शुरुआत दोपहर 3:26 बजे और समाप्ति शाम 7:57 बजे पर होगी। यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए देश में सूतक काल मान्य नहीं रहेगा।

शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण काल में वातावरण में विशेष प्रकार की ऊर्जा सक्रिय हो जाती है। ऐसे समय में दान, जप और साधना का महत्व सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना बढ़ जाता है। सूर्य ग्रहण के दौरान किया गया दान पापों का नाश करता है, नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है, ग्रह दोषों से मुक्ति दिलाता है और व्यक्ति के जीवन में आर्थिक व आध्यात्मिक समृद्धि लाता है। साथ ही, इस दान से पितरों को भी शांति प्राप्त होती है।

 

फाल्गुन अमावस्या की पूजा विधि

फाल्गुन अमावस्या के दिन प्रातः ब्रह्म बेला में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ, सफेद वस्त्र धारण करें और सूर्यदेव को जल का अर्घ्य दें।

इसके पश्चात विधि–विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें। धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर आरती करें और साष्टांग प्रणाम करें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए उनकी पूजा करें। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप और शिव चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें।

 

दान की महिमा

हिंदू धर्म में दान को सर्वोच्च पुण्य कर्म माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि धन की तीन गतियाँ होती हैं; दान, भोग और नाश। इनमें दान को श्रेष्ठ बताया गया है, क्योंकि दान से न केवल व्यक्ति को पुण्य प्राप्त होता है, बल्कि समाज में करुणा और समरसता का भाव भी बढ़ता है।

 

गोस्वामी तुलसीदास जी ने कलियुग में दान को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कहा है-

 

प्रगट चारि पद धर्म के, कलि महुँ एक प्रधान।

जेन केन बिधि दीन्हें दान, करइ कल्यान॥

 

अर्थात, धर्म के चार चरण (सत्य, दया, तप और दान) प्रसिद्ध हैं, जिनमें से कलियुग में दान ही प्रमुख है। किसी भी प्रकार से दिया गया दान व्यक्ति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।

 

फाल्गुन अमावस्या पर क्या दान करें?

फाल्गुन अमावस्या पर अन्नदान को महादान कहा गया है। इस दिन भूखे को भोजन कराना और जरूरतमंदों की सहायता करना विशेष पुण्यकारी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, किसी भूखे का पेट भरना सीधे भगवान को तृप्त करने के समान है। आप नारायण सेवा संस्थान के दीन–हीन, असहाय और जरूरतमंद बच्चों को भोजन कराने के सेवा प्रकल्प में सहयोग करके पुण्य के भागी बनें। 

फाल्गुन अमावस्या आत्मशुद्धि, पितृ ऋण से मुक्ति और सेवा भाव जागृत करने का पावन पर्व है। इस पर सूर्य ग्रहण का संयोग इसे और भी अधिक पुण्यदायी बना देता है। श्रद्धा, साधना और दान के माध्यम से न केवल पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि जीवन में सुख–समृद्धि और शांति का मार्ग भी प्रशस्त होता है। इस फाल्गुन अमावस्या पर, सेवा और करुणा के इस पवित्र भाव को अपनाकर मानवता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करें। 

 

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

 

प्रश्न: फाल्गुन अमावस्या 2026 कब है?

उत्तर: वर्ष 2026 में फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी को मनाई जाएगी।

 

प्रश्न: फाल्गुन अमावस्या किस देवता को समर्पित है?

उत्तर: फाल्गुन अमावस्या भगवान विष्णु और देवाधिदेव महादेव को समर्पित है।

 

प्रश्न: सूर्य ग्रहण 2026 कब है

उत्तर: सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगेगा। 

 

प्रश्न: सूर्य ग्रहण का समय क्या है

उत्तर: सूर्य ग्रहण दोपहर 3:26 बजे से शाम 7:57 बजे तक रहेगा। 

 

प्रश्न: फाल्गुन अमावस्या पर किन चीजों का दान करना चाहिए?

उत्तर: इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और भोजन का दान करना चाहिए।

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