भारतीय सनातन संस्कृति में प्रत्येक पर्व अपने भीतर आध्यात्मिक चेतना, आस्था और जीवन-दर्शन का गहरा संदेश समेटे होता है। इन्हीं पावन उत्सवों में से एक है हनुमान जन्मोत्सव। जो भगवान श्रीराम के परम भक्त, अद्भुत पराक्रमी और संकटमोचन श्री हनुमान जी के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी भगवान शिव के रुद्रांश अवतार माने जाते हैं, जिन्होंने वानर रूप में पृथ्वी पर अवतार लेकर धर्म की रक्षा की। उनका जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि जब शक्ति के साथ भक्ति और समर्पण जुड़ जाता है, तब असंभव भी संभव हो जाता है।
चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व उस दिव्य क्षण की स्मृति है, जब अंजनी माता के गर्भ से पवनपुत्र हनुमान ने जन्म लिया।
हनुमान जयंती का पावन पर्व चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा 2 अप्रैल को पड़ रही है। इसलिए हनुमान जयंती भी 2 अप्रैल, गुरुवार को मनाई जाएगी।
हनुमान जी के बाल्यकाल की लीलाएं उनकी दिव्यता को दर्शाती हैं। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, बाल रूप में उन्होंने सूर्य को लाल फल समझकर निगल लिया था। इससे संपूर्ण सृष्टि में अंधकार छा गया। देवताओं के निवेदन पर उन्होंने सूर्यदेव को पुनः मुक्त किया। यह प्रसंग उनके अपार बल का परिचायक है।
हनुमान जयंती के दिन पवनसुत हनुमान जी का ध्यान करते हुए बोलें-
मनोजवं मारुततुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
अर्थात् जो मन के समान वेगवान हैं, इंद्रियों को जीतने वाले हैं और बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, उन पवनपुत्र श्रीरामदूत की मैं शरण लेता हूँ।
हनुमान जी का संपूर्ण जीवन भगवान श्रीराम की सेवा में समर्पित रहा। उनके लिए शक्ति, ज्ञान और सिद्धियाँ केवल साधन थीं। उनका मुख्य उद्देश्य था प्रभु की सेवा। उन्होंने कभी अपने बल का प्रदर्शन अहंकारवश नहीं किया, बल्कि हर कार्य में विनम्रता और समर्पण को प्राथमिकता दी।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने उन्हें महाप्रभु और महातपस्वी कहा है, जो अपने त्याग और सेवा के आदर्श के कारण अभी भी इस ब्रह्मांड में विद्यमान हैं। यही कारण है कि वे केवल बल के प्रतीक नहीं, बल्कि आदर्श भक्त के रूप में पूजे जाते हैं।
हनुमान जयंती पर जन्मे संकटमोचन के रूप में पूजित हनुमान जी अपने भक्तों के सभी कष्ट हरने वाले माने जाते हैं। मान्यता है कि जिस घर में हनुमान चालीसा का नियमित पाठ होता है, वहां नकारात्मक शक्तियाँ प्रवेश नहीं कर पातीं। उनका नाम स्वयं में एक दिव्य मंत्र है, जो भय, दुख और संकट को दूर करने की क्षमता रखता है।
हनुमान जयंती के दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें। इसके पश्चात हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर विधिपूर्वक पूजा करें।
पूजन में विशेष रूप से निम्न वस्तुएं अर्पित करें-
इस दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करें। उपवास रखें और सायंकाल प्रसाद वितरण करें और ग्रहण करें। मंदिरों में भजन-कीर्तन, अखंड पाठ और विशेष आरती का आयोजन होता हैं, इन सभी में भाग अवश्य लें।
हनुमान जी हमें यह प्रेरणा देते हैं कि सच्ची शक्ति वही है, जो दूसरों के कल्याण में लगे। उन्होंने अपने सामर्थ्य का उपयोग सदैव धर्म की रक्षा और प्रभु की सेवा में किया। वे हमें सिखाते हैं कि अहंकार त्यागकर यदि हम समर्पण भाव से कार्य करें, तो जीवन में सफलता और संतोष दोनों प्राप्त होते हैं।
हनुमान जन्मोत्सव जीवन को सही दिशा देने वाला एक आध्यात्मिक अवसर है। इस पावन दिन पर यदि हम हनुमान जी के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें। तो निश्चित ही हमारा जीवन भी सुख, शांति और सफलता से भर जाएगा।
और अंत में-
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं, दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं, रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत के समान कांतियुक्त शरीर वाले, दैत्यरूपी वन के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथ जी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्री हनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूं।