श्रावण मास आध्यात्मिक जागरण का वह पवित्र काल है जब प्रकृति और चेतना दोनों ही भगवान शिव की भक्ति में लीन हो जाते हैं। चारों ओर हरियाली, रिमझिम वर्षा और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता वातावरण इस बात का संकेत देता है कि यह समय साधना, संयम और सेवा के माध्यम से ईश्वर से जुड़ने का है।
प्रत्येक एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के लिए समर्पित मानी जाती है, लेकिन सभी एकादशी में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का महत्व सबसे विशेष माना गया है। इसे हरिशयनी एकादशी, पद्मा एकादशी और आषाढ़ी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।