भारतीय संस्कृति में कुछ पर्व ऐसे हैं, जो रिश्तों की गहराई और जीवन के संस्कारों को अभिव्यक्त करते हैं। रक्षाबंधन भी ऐसा ही पावन पर्व है। श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्यौहार भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आपसी समर्पण का प्रतीक है। बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तो उस छोटे-से धागे में प्रेम और मंगलकामना का भाव समाहित होता है।
श्रावण मास भगवान शिव की भक्ति और आराधना का महीना माना जाता है। पूरे सावन में शिवभक्त जलाभिषेक, मंत्रजाप, व्रत और पूजा के माध्यम से भोलेनाथ की आराधना करते हैं। इसी पावन मास के समापन पर आने वाली श्रावण पूर्णिमा भक्ति, आस्था, पारिवारिक प्रेम और सेवा-भाव को एक साथ जोड़ने वाला विशेष पर्व है।
श्रावण मास स्वयं भगवान शिव और भगवान विष्णु की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन व्रत, पूजा, भगवान विष्णु का स्मरण, कथा श्रवण तथा जरूरतमंदों की सेवा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है।