भाद्रपद शुक्ल पक्ष की परिवर्तिनी एकादशी का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यता है कि चतुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में विराजमान रहते हैं और परिवर्तिनी एकादशी के दिन करवट बदलते हैं।
इस भवसागर से मुक्त हो चुके पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध पक्ष में जो विधिपूर्वक श्रद्धायुक्त होकर तर्पण, दान आदि किया जाता है उसे श्राद्ध कहा जाता है। इसे महालय और पितृ पक्ष के नाम से भी जाना जाता है।