हिंदू धर्म में हर दिन कोई न कोई त्योहार होता है। उन त्योहारों में एकादशी भी एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। इसे सबसे पवित्र दिनों में से एक माना जाता है। एकादशी पूरे भारत और विदेशों में लाखों भक्तों द्वारा मनाई जाती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में लगभग 24 और प्रत्येक माह में दो एकादशी तिथि आती हैं। सभी एकादशियों का अलग महत्व होता है। साल की अंतिम एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है। ‘सफला’ का अर्थ है ‘समृद्ध होना’।
पौष मास के कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि को यह मनाई जाती है।
पद्म पुराण के अनुसार, युधिष्ठिर के प्रश्न पर भगवान विष्णु ने बताया कि बड़े से बड़े यज्ञो अनुष्ठान से उतना संतोष नहीं मिलता जितना एकादशी व्रत से।
जैसे नागों में शेषनाग, पक्षियों में गरुड़ और ग्रहों में चंद्रमा श्रेष्ठ हैं, उसी तरह सारे व्रतों में एकादशी का व्रत सबसे प्रमुख है। इस दिन व्रत करने वाले की सारी इच्छाएँ पूरी होती हैं और संकट दूर होते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि सफला एकादशी का व्रत करने से संसार में सुख, सफलता, समृद्धि और सौभाग्य मिलता है। इस दिन घर की उत्तर दिशा में गेंदे का फूल लगाना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह विष्णु जी को अति प्रिय है।
सफला एकादशी पौष मास के कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि, सोमवार, 6 जनवरी 2024 को देर रात 12:41 बजे शुरू होकर 7 जनवरी 2024 देर रात 12:46 बजे तक रहेगी।
इस बार सफला एकादशी पर तीन योगों का निर्माण हो रहा है – बुधादित्य योग, लक्ष्मी नारायण योग और त्रिग्रही योग। यह कुछ राशियों के लिए विशेष शुभ समय ला सकता है।
एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। दिन में केवल सात्विक भोजन करें। तामसिक भोजन का सेवन न करें। किसी का अपमान न करें।
गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें और उन्हें भोजन कराएँ। गायों की सेवा करें। नारायण सेवा संस्थान के साथ जुड़कर एकादशी के पावन अवसर पर गरीब एवं दिव्यांग बच्चों को भोजन कराएँ।
एकादशी पर दिया गया दान हजारों पुण्य के समान फल देने वाला माना जाता है। जरूरतमंदों को गर्म कपड़े या कंबल का दान करना जीवन में सौभाग्य लाता है।
शास्त्रों में विद्या का दान श्रेष्ठ माना गया है। इसे बांटने से और अधिक बढ़ता है। एकादशी के दिन गरीब बच्चों को शिक्षा से संबंधित वस्तुएँ दान करना समाज के कल्याण के लिए फायदेमंद है।
इस दिन किसी गरीब बच्चे की पढ़ाई का जिम्मा उठाने का संकल्प लेने से मां लक्ष्मी और देवी सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही किसी बीमार या असहाय व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी मदद करने से अपार पुण्य प्राप्त होता है।