जब शरद ऋतु की मंद शीतलता वातावरण में उतरने लगती है, तब देवी आराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि अपने साथ भक्ति, शक्ति और साधना का संदेश लेकर आता है। नौ दिनों तक चलने वाला यह दिव्य पर्व माँ भगवती के नौ स्वरूपों की उपासना और आत्मशुद्धि का अवसर प्रदान करता है। भक्तजन इन दिनों माता के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हुए व्रत, पूजन, जप, पाठ, हवन और सेवा के माध्यम से जीवन को सात्विक बनाने का प्रयास करते हैं।
देवी की महिमा का वर्णन करते हुए देवी माहात्म्य में कहा गया है-
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थात जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति के रूप में विद्यमान हैं, उन जगदंबा को बार-बार नमन है। यही शक्ति नवरात्रि के प्रत्येक दिन साधक के भीतर श्रद्धा, आत्मबल और सकारात्मक चेतना का संचार करती है।
वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर 2026 से होगा। नवरात्रि का समापन 20 अक्टूबर 2026 को महानवमी एवं विजयादशमी के पावन अवसर के साथ होगा। अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात्रि 9:19 बजे से 11 अक्टूबर की रात्रि 9:30 बजे तक रहेगी।
नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना के साथ देवी उपासना का विधिवत शुभारंभ किया जाता है। कलश को देवी शक्ति का प्रतीक माना जाता है और इसकी स्थापना के माध्यम से साधक अपने घर में माँ भगवती का आवाहन करते हैं।
घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 06:19 बजे से 10:12 बजे तक
घटस्थापना सदैव शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से श्रद्धापूर्वक करना श्रेष्ठ माना जाता है।
नवरात्रि के नौ दिन माँ भगवती के नौ दिव्य स्वरूपों को समर्पित होते हैं। प्रथम दिन माँ शैलपुत्री, द्वितीय दिन माँ ब्रह्मचारिणी, तृतीय दिन माँ चंद्रघंटा, चतुर्थ दिन माँ कूष्मांडा, पंचम दिन माँ स्कंदमाता, षष्ठम दिन माँ कात्यायनी, सप्तम दिन माँ कालरात्रि, अष्टम दिन माँ महागौरी और नवम दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
माँ के प्रत्येक स्वरूप की अपनी विशिष्ट महिमा है। कोई स्वरूप साधना और तप का संदेश देता है तो कोई भय का नाश कर अभय प्रदान करता है। किसी स्वरूप में मातृत्व की करुणा दिखाई देती है तो किसी में अधर्म के विनाश की प्रचंड शक्ति। इसलिए नवरात्रि केवल बाहरी पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह साधक को अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानने का अवसर भी देती है।
माँ दुर्गा को आदिशक्ति, जगदंबा और संसार की पालनकर्ता शक्ति के रूप में पूजा जाता है। दुर्गा सप्तशती में देवी की स्तुति करते हुए कहा गया है-
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थात हे देवी! आप सभी मंगलों की मंगलस्वरूपा हैं, कल्याण प्रदान करने वाली हैं और सभी मनोरथों को पूर्ण करने वाली हैं। हे शरण देने वाली त्रिनेत्रधारी गौरी, हे नारायणी! आपको नमन है।
नवरात्रि का पर्व इसी शरणागति का संदेश देता है। जब मनुष्य अपने अहंकार, भय और चिंताओं को माँ के चरणों में समर्पित करता है, तब उसके भीतर विश्वास और आत्मबल का जागरण होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ भगवती ने महिषासुर जैसे अत्याचारी असुरों का संहार कर धर्म की रक्षा की। देवी और महिषासुर का यह प्रसंग हमें यह संदेश देता है कि जब अधर्म और अहंकार बढ़ता है, तब दिव्य शक्ति उसका विनाश कर धर्म की पुनः स्थापना करती है।
इसलिए नवरात्रि के नौ दिन अपने भीतर के क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और नकारात्मक विचारों पर विजय पाने के दिन माने जाते हैं।
नवरात्रि के दौरान अनेक श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं। व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि मन और इंद्रियों पर संयम का माध्यम है। इन दिनों सात्विक भोजन ग्रहण करना, भगवान का स्मरण करना, असत्य और कटु वचन से बचना तथा जरूरतमंदों की सेवा करना विशेष पुण्यकारी माना जाता है। नवरात्रि साधना का वास्तविक उद्देश्य मन को बाहरी विकारों से हटाकर माँ के चरणों में एकाग्र करना है।
अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन की विशेष परंपरा है। छोटी कन्याओं को माँ भगवती का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जाता है तथा वस्त्र, फल, उपहार और दक्षिणा अर्पित की जाती है।
कन्या पूजन हमें यह स्मरण कराता है कि मातृशक्ति केवल मंदिरों में स्थापित प्रतिमाओं में ही नहीं, बल्कि प्रत्येक कन्या और नारी में भी विद्यमान है। जरूरतमंदों की सहायता करना, अन्न का दान करना, असहायों की सेवा करना और किसी के जीवन में आशा का दीप जलाना भी माँ भगवती की आराधना का ही एक सुंदर स्वरूप है।
सनातन परंपरा में कहा जाता है कि माँ भगवती की आराधना उनके स्वरूप मानी जाने वाली नन्ही-मुन्नी कन्याओं की सेवा में भी निहित है। शारदीय नवरात्रि के इस पावन अवसर पर नारायण सेवा संस्थान 501 मासूम दिव्यांग कन्याओं के निःशुल्क ऑपरेशन का संकल्प लेकर उनके जीवन में नई आशा जगाने का पुनीत कार्य कर रहा है। शारीरिक दिव्यांगता के कारण जीवन की अनेक चुनौतियों से जूझ रही इन नन्हीं बेटियों के लिए आपका सहयोग उनके जीवन में चलने-फिरने, आत्मनिर्भर बनने और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का मार्ग खोल सकता है।
आप भी इस नवरात्रि माँ जगदम्बा की आराधना के साथ इन मासूम कन्याओं के जीवन में खुशियों का उजाला लाने का संकल्प लें। आपके सहयोग से किसी बेटी के जीवन में नई उम्मीद जन्म ले सकती है और सेवा का यह भाव माँ भगवती के चरणों में सच्ची श्रद्धा अर्पित करने का माध्यम बन सकता है।
प्रश्न: शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी?
उत्तर: शारदीय नवरात्रि 2026 का शुभारंभ 11 अक्टूबर 2026 से होगा।
प्रश्न: शारदीय नवरात्रि 2026 में घटस्थापना कब की जाएगी?
उत्तर: नवरात्रि 2026 में घटस्थापना 11 अक्टूबर को की जाएगी। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06:19 बजे से 10:12 बजे तक है। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा।
प्रश्न: शारदीय नवरात्रि 2026 कब समाप्त होगी?
उत्तर: शारदीय नवरात्रि 2026 का समापन 20 अक्टूबर 2026 को महानवमी के साथ होगा।
प्रश्न: नवरात्रि में माँ दुर्गा के कौन-कौन से नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है?
उत्तर: नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री स्वरूपों की पूजा की जाती है।
प्रश्न: नवरात्रि में घटस्थापना के लिए किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है?
उत्तर: घटस्थापना के लिए सामान्यतः कलश, जल, सुपारी, सिक्का, आम के पत्ते, नारियल, लाल वस्त्र, अक्षत, जौ या गेहूं और पूजा सामग्री का उपयोग किया जाता है।
प्रश्न: नवरात्रि में क्या दान करना शुभ माना जाता है?
उत्तर: नवरात्रि को पूजा के साथ दान और सेवा का भी महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, शिक्षा या अन्य आवश्यक सहायता प्रदान करना पुण्यदायी होता है।