13 January 2026

खरमास के बाद कब से शुरू होंगे शुभ कार्य? जानें धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व

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हिंदू धर्म में समय की शुद्धता और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का विशेष महत्व माना गया है। कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य; जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत आदि शुभ मुहूर्त देखकर ही संपन्न किए जाते हैं। इन्हीं नियमों के अंतर्गत एक विशेष काल आता है, जिसे खरमास कहा जाता है। यह अवधि साधना और आत्मचिंतन के लिए उपयुक्त मानी जाती है, जबकि मांगलिक कार्यों के लिए इसे वर्जित माना गया है।

 

खरमास क्या है और कब प्रारंभ होता है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्यदेव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब से खरमास की शुरुआत होती है। इस वर्ष खरमास का प्रारंभ 16 दिसंबर को दिन में 1:24 बजे से हुआ है। इसके साथ ही विवाह एवं अन्य शुभ संस्कारों पर विराम लग गया है। यह अवधि 14 जनवरी 2026 की रात्रि तक रहेगी।

धार्मिक मान्यता है कि इस काल में सूर्य देव की ऊर्जा क्षीण हो जाती है। सूर्य देव को तेज और जीवन शक्ति का कारक माना गया है। जब सूर्य दुर्बल होते हैं, तब शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए यह समय अनुकूल नहीं माना जाता। इसी कारण इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत जैसे शुभ संस्कार नहीं किए जाते।

 

मकर संक्रांति के बाद भी क्यों नहीं होंगे शुभ कार्य?

सामान्यतः मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव उत्तरायण होते हैं और इसके साथ ही खरमास समाप्त माना जाता है। उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा गया है, इसलिए इसे अत्यंत शुभ काल माना जाता है। लेकिन इस वर्ष स्थिति कुछ भिन्न है।

इस बार शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण मकर संक्रांति (14 जनवरी 2026) के बाद भी विवाह और अन्य मांगलिक कार्य आरंभ नहीं हो पाएंगे। ज्योतिष के अनुसार, शुक्र ग्रह 11 दिसंबर 2025 को अस्त हो चुके हैं। शुक्र को प्रेम, वैवाहिक सुख, ऐश्वर्य और दांपत्य जीवन का प्रमुख कारक ग्रह माना जाता है। जब शुक्र अस्त होते हैं, तब विवाह जैसे संस्कार शुभ फल नहीं देते। इसी कारण इस वर्ष भले ही सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे, लेकिन शुक्र के अस्त रहने से मांगलिक कार्यों पर रोक बनी रहेगी।

 

विवाह मुहूर्त कब से शुरू होंगे?

शुक्र ग्रह लगभग 53 दिनों तक अस्त रहेंगे और 1 फरवरी 2026 को पुनः उदय होंगे। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, किसी ग्रह के उदय के तीन दिन बाद से ही उसके शुभ प्रभाव पूर्ण रूप से माने जाते हैं। ऐसे में इस वर्ष 4 फरवरी 2026 से शुभ मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हटेगी।

अर्थात 16 दिसंबर 2025 से खरमास प्रारंभ हुआ जो 14 जनवरी 2026 को समाप्त हो रहा है। 1 फरवरी 2026 को शुक्र उदय होंगे और 4 फरवरी 2026 से विवाह व अन्य शुभ कार्य पुनः आरंभ हो जाएंगे। 

 

खरमास में क्या करें?

हालाँकि खरमास में मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं, लेकिन यह समय धार्मिक साधना और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस काल में भगवान विष्णु और सूर्यदेव की उपासना, दान, जप, तप और सेवा; कथा-श्रवण, भजन और ध्यान; निर्धनों, असहायों एवं दिव्यांगजनों की सेवा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

इस काल से पता चलता है कि जीवन में हर समय कर्म नहीं, बल्कि कर्म के साथ संयम और साधना भी आवश्यक होती है। यह अवधि बाहरी उत्सवों से अधिक आंतरिक शुद्धि और आत्मोन्नति का संदेश देती है। विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए भले ही कुछ समय और प्रतीक्षा करनी पड़े, लेकिन यह काल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी है।

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