15 January 2026

जया एकादशी 2026 : मोक्ष की ओर अग्रसर होने का दिव्य अवसर, जानें तिथि और शुभ मुहूर्त

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सनातन धर्म में एकादशी व्रतों का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। प्रत्येक एकादशी अपने भीतर एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा समेटे होती है, परंतु जया एकादशी को सभी एकादशियों में विशेष फलदायी माना गया है। यह पावन तिथि माघ मास के शुक्ल पक्ष में आती है और शास्त्रों में इसे पापों का नाश करने वाली तथा मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी कहा गया है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु विधिपूर्वक जया एकादशी का व्रत करता है, वह जन्म-जन्मांतर के बंधनों से मुक्त होकर भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा का पात्र बनता है।

 

जया एकादशी का पौराणिक महत्व

जया एकादशी का वर्णन हिन्दू धर्मग्रंथों में मिलता है। इसमें बताया गया है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति भूत, प्रेत, पिशाच जैसी योनि से मुक्त हो जाता है और उसे सद्गति की प्राप्ति होती है। यह एकादशी आत्मशुद्धि, मन की पवित्रता और कर्मों के प्रायश्चित का श्रेष्ठ साधन मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, नाम-स्मरण और दान करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और मनुष्य के जीवन में सुख, शांति और धर्म की वृद्धि होती है।

 

जया एकादशी 2026 : तिथि और शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में जया एकादशी का पावन व्रत 29 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। एकादशी तिथि का प्रारंभ 28 जनवरी 2026 को सायं 4:35 बजे होगा, जबकि इसका समापन 29 जनवरी 2026 को दोपहर 1:55 बजे पर होगा। हिंदू धर्म में उदयातिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी को ही रखा जाएगा।

 

व्रत पारण का समय

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि पारण सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना चाहिए। द्रिक पंचांग के अनुसार, 30 जनवरी 2026 को प्रातः 7:09 बजे से 9:24 बजे तक व्रत पारण का उत्तम समय रहेगा। इस समय में पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

 

जया एकादशी व्रत का आध्यात्मिक फल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जया एकादशी का व्रत ब्रह्महत्या जैसे महापापों से भी मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। यह व्रत व्यक्ति के भीतर छिपे दोषों को समाप्त कर उसे सद्गुणों की ओर ले जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं, मानसिक शांति प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से जो व्यक्ति भय, रोग, दरिद्रता या मानसिक अशांति से ग्रस्त है, उसके लिए जया एकादशी का व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है।

 

दान का महत्व : सनातन परंपरा की दृष्टि से

सनातन धर्म में व्रत तभी पूर्ण माना जाता है जब उसके साथ दान भी किया जाए। दान को धर्म का मूल आधार कहा गया है। जया एकादशी जैसे पुण्य पर्व पर किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है।

गोस्वामी तुलसीदास जी ने दान की महिमा को इन शब्दों में व्यक्त किया है—

 

तुलसी पंछी के पिये, घटे न सरिता नीर।

दान दिए धन न घटे, जो सहाय रघुवीर॥

 

अर्थात जैसे पक्षियों द्वारा जल पीने पर भी नदी का जल कम नहीं होता, वैसे ही जो व्यक्ति भगवान पर विश्वास रखते हुए दान करता है, उसका धन कभी घटता नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा से बढ़ता ही है। 

 

जया एकादशी पर क्या दान करें? 

जया एकादशी पर अन्नदान को सर्वश्रेष्ठ दान माना गया है। इस दिन भूखे को भोजन कराना, निर्धन और असहाय लोगों की सहायता करना अत्यंत पुण्यदायी होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि अन्नदान करने वाला व्यक्ति कभी भूख और अभाव से ग्रस्त नहीं होता।

इस पावन अवसर पर नारायण सेवा संस्थान के माध्यम से दीन-दु:खी और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने के सेवा प्रकल्प में सहयोग कर पुण्य के भागी बनें। 

 

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

 

प्रश्न: जया एकादशी 2026 कब है?

उत्तर: साल 2026 में जया एकादशी 29 जनवरी को मनाई जाएगी। 

 

प्रश्न: जया एकादशी कौन से भगवान के लिए समर्पित है?

उत्तर: जया एकादशी भगवान विष्णु के लिए समर्पित है। 

 

प्रश्न: जया एकादशी पर किन चीजों का दान करना चाहिए?

उत्तर: जया एकादशी पर जरूरतमंदों को अन्न और भोजन का दान करना चाहिए।

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