सनातन परंपरा में नवरात्रि आदिशक्ति माँ दुर्गा की आराधना का दिव्य काल है। इन पावन नौ दिनों में जगत जननी माँ अम्बे के विविध स्वरूपों की उपासना कर भक्त अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि नवरात्रि का प्रत्येक क्षण साधना और सेवा के लिए अत्यंत फलदायी होता है।
नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
नवरात्रि आत्मशुद्धि, शक्ति संचय और करुणा के जागरण का पर्व है। इस कालखंड में जो साधक श्रद्धा और विश्वास के साथ माँ भगवती की आराधना करता है; माँ स्वरूप कन्याओं का पूजन करता है, उस पर माँ अम्बे की कृपा सदा बनी रहती है। सनातन परंपरा में कन्या पूजन को स्वयं आदिशक्ति की आराधना माना गया है, शास्त्रों में कन्याओं को देवी का साकार रूप बताया गया है।
सेवा का संकल्प
नवरात्रि के पावन अवसर पर नारायण सेवा संस्थान 501 दिव्यांग कन्याओं का निःशुल्क ऑपरेशन कराकर उन्हें सकलांग और सम्मानपूर्ण जीवन प्रदान करने का पुनीत कार्य कर रहा है। अनेक मासूम कन्याएं शारीरिक दिव्यांगता के कारण जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। आपके सहयोग से उनके जीवन में चलने, मुस्कुराने और आत्मनिर्भर बनने की नई आशा जागेगी।
धार्मिक ग्रंथों में दान के महत्व का वर्णन करते हुए कहा गया है-
पात्रेभ्यः दीयते नित्यमनपेक्ष्य प्रयोजनम् ।
केवलं त्यागबुद्ध्या यद् धर्मदानं तदुच्यते ॥
अर्थात् जो दान बिना किसी स्वार्थ और अपेक्षा के, केवल त्याग और करुणा की भावना से दिया जाए, वही सच्चा धर्मदान है।
चैत्र नवरात्रि पर संकल्प लें
चैत्र नवरात्रि के इस पुण्यकाल में दिव्यांग कन्याओं के पूजन एवं ऑपरेशन हेतु सहयोग करें और माँ जगदम्बा की विशेष कृपा प्राप्त करें। आपके दान से नन्ही मासूम दिव्यांग कन्याओं का ऑपरेशन कर उन्हें स्वस्थ और आत्मनिर्भर भविष्य प्रदान किया जाएगा।
आपके दान से मासूम दिव्यांग कन्याओं का ऑपरेशन करवाया जाएगा