सनातन धर्म में माघ मास को तप, त्याग और सेवा का विशेष महीना माना गया है। माघ मास में आने वाली पूर्णिमा तिथि आध्यात्मिक साधना का शिखर मानी जाती है। माघ पूर्णिमा वह पावन दिन है, जब गंगा स्नान, दान-पुण्य, जप-तप और सेवा से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किए गए पुण्य कर्म जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय कर आत्मा को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं।
माघ पूर्णिमा का पौराणिक महत्व
पुराणों में वर्णित है कि माघ पूर्णिमा के दिन देवता स्वयं पृथ्वी पर आकर गंगा एवं तीर्थों में स्नान करते हैं। पद्म पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, जो साधक माघ मास में नियमपूर्वक स्नान, दान और भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसे कल्पवास के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन सत्य, संयम और सेवा के साथ किया गया प्रत्येक कर्म सहस्र गुना फल देता है और साधक के जीवन के कष्टों का निवारण करता है।
दान और सेवा का महत्व
माघ पूर्णिमा स्नान और व्रत के साथ करुणा और परोपकार का महापर्व है। इस दिन अन्नदान, वस्त्रदान और असहायों की सेवा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। दान का उल्लेख करते हुए शास्त्रों में कहा गया है—
अल्पमपि क्षितौ क्षिप्तं वटबीजं प्रवर्धते ।
जलयोगात् यथा दानात् पुण्यवृक्षोऽपि वर्धते ॥
जमीन पर डाला हुआ छोटा सा वटवृक्ष का बीज, जैसे जल के योग से बढता है, वैसे पुण्यवृक्ष भी दान से बढता है ।
माघ पूर्णिमा पर करें ये दान
माघ पूर्णिमा के पुण्यदायी अवसर पर नारायण सेवा संस्थान के दीन-हीन, असहाय, दिव्यांग बच्चों के भोजन कराने के प्रकल्प में सहयोग करके पुण्य के भागी बनें।