सनातन परंपरा में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी तिथि मानी गई है। धार्मिक मान्यता है कि अजा एकादशी का व्रत श्रद्धापूर्वक रखने, भगवान विष्णु का स्मरण करने, उनके नाम का जाप करने और जरूरतमंदों की सेवा करने से भक्त को पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
अजा एकादशी का धार्मिक महत्व
भगवान विष्णु को जगत का पालनहार कहा गया है। वे अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखते हैं और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। एकादशी तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष मानी गई है। मान्यता है कि इस दिन सच्ची श्रद्धा से किया गया व्रत, पूजन और दान मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर प्रभु की भक्ति की ओर ले जाता है।
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं-
पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।
तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः॥
अर्थात् जो भक्त प्रेम और भक्ति से मुझे पत्र, पुष्प, फल या जल अर्पित करता है, उसकी उस भक्ति से अर्पित वस्तु को मैं स्वीकार करता हूं।
दान और सेवा
सनातन संस्कृति में पूजा और व्रत के साथ दान और सेवा को भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। हिन्दू धर्म में जरूरतमंदों के जीवन में सहारा और प्रसन्नता लाना भी ईश्वर की आराधना का ही एक रूप माना गया है।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है-
तुलसी पंछी के पिये, घटे न सरिता नीर ।
दान दिये धन ना घटे, जो सहाय रघुवीर ।।
अर्थात् जिस प्रकार पक्षियों के पानी पीने से नदी का जल कम नहीं होता, उसी प्रकार भगवान श्री राम की कृपा होने पर परोपकार व दान देने से मनुष्य का धन कभी कम नहीं होता है।
दीन-हीन, असहाय, दिव्यांग बच्चों को भोजन कराएं
इस अजा एकादशी के पुण्यदायी अवसर पर नारायण सेवा संस्थान द्वारा दीन-हीन, निर्धन, असहाय एवं दिव्यांग बच्चों के लिए भोजन सेवा की जा रही है। आप भी अपनी श्रद्धा को सेवा से जोड़ें और किसी जरूरतमंद बच्चे की थाली तक पौष्टिक मीठा भोजन पहुंचाने में सहभागी बनें।
इस पावन अजा एकादशी पर भगवान विष्णु का स्मरण करें, हरि नाम का जाप करें, व्रत और पूजा के साथ सेवा का संकल्प लें और किसी जरूरतमंद के जीवन में खुशियों का एक छोटा-सा दीप जलाएं।