सनातन संस्कृति में नवरात्रि को विशेष रूप से दिव्य और शक्तिशाली उत्सव माना गया है। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, साधना और भक्ति का अनुपम संगम है।
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाए जाने वाले चैत्र नवरात्रि में भक्त श्रद्धा और समर्पण के साथ माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की उपासना करते हैं। इस समय सम्पूर्ण ब्रह्मांड में एक सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, जिससे साधकों को आध्यात्मिक जागरण और आत्मिक शुद्धि का विशेष अवसर प्राप्त होता है।
चैत्र नवरात्रि का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सृष्टि और प्रकृति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यही वह समय है जब ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी।
यह हिंदू नववर्ष का प्रारंभ भी होता है, और इसी दौरान भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। इसलिए, चैत्र नवरात्रि को सृष्टि, धर्म और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ सर्वार्थ सिद्धि योग में हो रहा है, जो इसे अत्यंत मंगलकारी बनाता है। साथ ही, इसी दिन इंद्र योग भी बन रहा है, जिससे पूजा-पाठ का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा।
इन विशेष योगों के संयोग में की गई साधना और भक्ति का प्रभाव कई गुना अधिक माना जाता है। आमतौर पर चैत्र नवरात्रि नौ दिनों की होती है, लेकिन इस बार यह आठ दिनों की रहेगी। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 30 मार्च 2025 से 6 अप्रैल 2025 तक मनाई जाएगी।
इस वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का शुभारंभ 29 मार्च की संध्या 4 बजकर 27 मिनट पर होगा, जो 30 मार्च को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक विद्यमान रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, चैत्र नवरात्रि का पावन आरंभ 30 मार्च से होगा। इस दिन कलश स्थापना बेहद महत्वपूर्ण होती है, जिससे देवी शक्ति का आवाहन किया जाता है।
इस बार कलश स्थापना का मुहूर्त 30 मार्च को प्रातः 6 बजकर 13 मिनट से 10 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इस मंगलमयी समय में कलश स्थापना करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि में महाष्टमी और महानवमी का विशेष संयोग बन रहा है, क्योंकि पंचमी तिथि का क्षय हो रहा है। भक्तजन माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना पूरे श्रद्धा भाव से करेंगे।
इस बार अष्टमी तिथि का शुभ व्रत एवं पूजन 5 अप्रैल को संपन्न होगा, इसी दिन भक्तजन कन्या पूजन कर देवी शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। वहीं, 6 अप्रैल को महानवमी का महोत्सव मनाया जाएगा और इसी दिन प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव का पावन पर्व, राम नवमी भी मनाया जाएगा।
नवरात्रि के पावन दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है—
नवरात्रि उपासना और साधना के साथ ही सेवा और परोपकार का भी श्रेष्ठ समय है। शास्त्रों में कहा गया है कि इन नौ दिनों में किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है और भक्त को माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।
विशेष रूप से अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्याओं को भोजन कराना, वस्त्र एवं दक्षिणा देना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इस पावन अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता करना न केवल हमारे भीतर करुणा और सहानुभूति का संचार करता है, बल्कि इससे माता रानी भी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
इस नवरात्रि पर नारायण सेवा संस्थान 501 मासूम दिव्यांग कन्याओं का कन्या पूजन करवाने जा रहा है। जिसमें दिव्यांग कन्याओं को सकलांग जिंदगी देने के लिए उनका नि:शुल्क ऑपरेशन किया जाएगा एवं माँ अम्बे का स्वरूप मानकर चुनरी ओढ़ाकर उनकी पूजा अर्चना की जाएगी।
साथ ही कन्याओं को मीठे भोजन का भोग लगाया जाएगा। नवरात्रि पर दिव्यांग कन्याओं के इस सेवा प्रकल्प में सहयोग करें और जगत जननी माँ जगदंबा का आशीर्वाद प्राप्त करें।
चैत्र नवरात्रि आत्मशुद्धि और ईश्वरीय कृपा प्राप्त करने का शुभ अवसर है। यह हमें माँ दुर्गा की उपासना के माध्यम से शक्ति, संयम, भक्ति और श्रद्धा की शिक्षा देता है।
जो भी भक्त सच्चे मन से माँ की आराधना करता है, उसके जीवन में नकारात्मकता समाप्त हो जाती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। इस पावन पर्व पर हम सभी माँ दुर्गा का आह्वान करें और उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करें—
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
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