दिव्यांग विवाह में दान देकर जोड़ो की
प्रेम के पावन उत्सव को साकार करना और उन नवदंपतियों के लिए जीवनभर की अमिट यादें रचना,
जो हर खुशी, सम्मान और स्नेह के सच्चे हकदार हैं।
हमारी परंपरा में कन्यादान और विवाह सहयोग को दान के सबसे पवित्र रूपों में माना जाता है। जब आप किसी दिव्यांग और आर्थिक रूप से वंचित जोड़े के विवाह को संपन्न कराने में सहयोग करते हैं, तो आप केवल एक समारोह का आयोजन नहीं करते, बल्कि सम्मान, साथ और आशा से भरे जीवन की शुरुआत करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि विवाह में सहयोग करने से आजीवन पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं, क्योंकि आप एक नए परिवार की यात्रा के मौन संरक्षक बन जाते हैं। करुणा से किया गया यह कार्य मानवता की सर्वोच्च भावना को दर्शाता है, जहाँ दान साझा आनंद में परिवर्तित हो जाता है।
हिंदू धर्म में विवाह में दान देने की परंपरा अनादि काल से चली आ रही है। यह दान कन्यादान, मायरा, पाणिग्रहण, भोजन, श्रृंगार, वस्त्र तथा मेहंदी-हल्दी के सहयोग के रूप में हो सकता है।
नए जीवन की शुरुआत हेतु पारंपरिक उपहार
विवाह संस्कार की पवित्र रस्में
विशेष दिन हेतु वस्त्र व आभूषण
समुदाय हेतु पोषण एवं सत्कार
सौंदर्य एवं आध्यात्मिक रस्में
दंपति के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण
"कन्यादान के रूप में विवाह में सहयोग करना, सर्वोच्च पुण्य है जो स्वर्ग और मोक्ष तक ले जाने वाला पावन कर्म माना गया है।"
हमारे मिशन को विश्वभर के प्रमुख मीडिया माध्यमों द्वारा मान्यता मिली है और कवरेज किया गया है