पितृ पक्ष की अंतिम तिथि को सर्व पितृ अमावस्या कहा जाता है। यह अमावस्या उन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के स्मरण के लिए विशेष मानी जाती है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात न हो अथवा किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर उनका श्राद्ध न हो पाया हो।
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी भी ऐसी ही पुण्यदायिनी तिथि है। पितृ पक्ष के समय आने के कारण इस दिन भगवान विष्णु की उपासना के साथ श्रद्धा और सत्कर्म का विशेष भाव जुड़ा रहता है।
इस भवसागर से मुक्त हो चुके पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध पक्ष में जो विधिपूर्वक श्रद्धायुक्त होकर तर्पण, दान आदि किया जाता है उसे श्राद्ध कहा जाता है। इसे महालय और पितृ पक्ष के नाम से भी जाना जाता है।