30 August 2026

अजा एकादशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत विधि, पूजा और दान का धार्मिक महत्व

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सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है। वर्षभर में आने वाली प्रत्येक एकादशी का अपना विशेष धार्मिक महत्व है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा, व्रत, हरि नाम का स्मरण और जरूरतमंदों की सेवा करने से मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति होती है तथा साधक पर भगवान श्रीहरि की कृपा बनी रहती है।

अजा एकादशी को पापों का नाश करने वाली एकादशी भी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से किया गया व्रत और भगवान की भक्ति मनुष्य को आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।

 

अजा एकादशी 2026 कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 6 सितंबर को शाम 7 बजकर 29 मिनट से प्रारंभ होगी और 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। हिन्दू धर्म में उदयातिथि की मान्यता है, अतः अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा।

व्रत का पारण 8 सितंबर को प्रातः 6 बजकर 21 मिनट से 8 बजकर 50 मिनट के बीच किया जा सकेगा। व्रत और पारण के लिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

 

अजा एकादशी का धार्मिक महत्व

भगवान विष्णु को जगत का पालनहार कहा गया है। वे सृष्टि में धर्म, मर्यादा और संतुलन बनाए रखने वाले देवता माने जाते हैं। इसलिए एकादशी के दिन श्रीहरि की आराधना करने से साधक के मन में भक्ति और सद्भाव की भावना जागृत होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार अजा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति देने वाला और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला माना गया है। इस दिन व्रत रखने के साथ भगवान विष्णु की कथा सुनना, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना और हरि नाम का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है।

 

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं-

पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति ।

तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मन: ॥

अर्थात यदि कोई मुझे श्रद्धा भक्ति के साथ पत्र, पुष्प, फल या जल ही अर्पित करता है तब मैं प्रसन्नतापूर्वक अपने भक्त द्वारा प्रेमपूर्वक और शुद्ध मानसिक चेतना के साथ अर्पित उस वस्तु को स्वीकार करता हूँ।

 

अजा एकादशी पर व्रत कैसे रखें?

अजा एकादशी का व्रत श्रद्धा और आत्मशुद्धि का पर्व है। व्रत रखने वाले भक्त दशमी तिथि की रात से ही सात्विक आहार ग्रहण करें। एकादशी के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें। अपनी सामर्थ्य और स्वास्थ्य के अनुसार निर्जल, जल या फलाहार व्रत रखा जा सकता है। एकादशी व्रत में अन्न और चावल का सेवन न करने की परंपरा है। दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

व्रत के दौरान मन, वाणी और कर्म को सात्विक रखने का प्रयास करें। भगवान की कथा सुनें, भजन-कीर्तन करें और यथासंभव धार्मिक कार्यों में समय बिताएं। अगले दिन द्वादशी तिथि में निर्धारित पारण समय पर भगवान की पूजा करने के बाद व्रत खोलें।

 

अजा एकादशी की पूजा विधि

अजा एकादशी के दिन पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को स्वच्छ करें। एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद भगवान को जल से स्नान कराएं और चंदन, पीले फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें। फल और मिठाई का भोग लगाएं।

पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और अजा एकादशी की व्रत कथा का श्रवण करें। शाम के समय भगवान की आरती करें और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि तथा मंगल की प्रार्थना करें।

 

अजा एकादशी पर दान का महत्व

सनातन संस्कृति में दान को पुण्यकारी कर्म माना गया है। दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद के जीवन में सहायता और प्रसन्नता पहुंचाने का भाव है। श्रीमद्भगवद्गीता में दान के महत्व को बताते हुए भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं-

दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे।

देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्॥

अर्थात जो दान कर्तव्य समझकर, किसी प्रतिफल की इच्छा के बिना, उचित समय, स्थान और पात्र को दिया जाता है, वह सात्विक दान कहलाता है।

 

अजा एकादशी पर करें भोजन का दान

अन्न और भोजन का दान सनातन परंपरा में सबसे श्रेष्ठ माना गया है। किसी भूखे व्यक्ति की थाली तक भोजन पहुंचाना मानवता और करुणा का सुंदर उदाहरण है। इसी भावना के साथ नारायण सेवा संस्थान द्वारा दीन-हीन, निर्धन, असहाय एवं दिव्यांग बच्चों के लिए भोजन सेवा की जा रही है। अजा एकादशी के इस पावन अवसर पर आप भी अपनी श्रद्धा को सेवा से जोड़ें और किसी जरूरतमंद बच्चे की थाली तक पौष्टिक मीठा भोजन पहुंचाने में सहभागी बनें।

अजा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करें, हरि नाम का जाप करें, व्रत का पालन करें तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-सेवा का संकल्प लें। 

 

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

 

 

 

 

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

 

प्रश्न: अजा एकादशी 2026 कब मनाई जाएगी?

उत्तर: अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026 को रखा जाएगा।

प्रश्न: अजा एकादशी की तिथि कब से कब तक रहेगी?

उत्तर: एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 को शाम 7:29 बजे से शुरू होकर 7 सितंबर को शाम 5:03 बजे तक रहेगी।

प्रश्न: अजा एकादशी व्रत का पारण कब किया जाएगा?

उत्तर: अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर 2026 को सुबह 6:21 बजे से 8:50 बजे के बीच किया जा सकेगा।

प्रश्न: अजा एकादशी पर किस भगवान की पूजा की जाती है?

उत्तर: अजा एकादशी पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

प्रश्न: अजा एकादशी पर किन चीजों का दान करना चाहिए?

उत्तर: अजा एकादशी पर भोजन और अन्न का दान करना चाहिए।

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