23 January 2026

77वाँ गणतंत्र दिवस : परंपराएं, रीति-रिवाज और राष्ट्रीय उत्सव

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भारत हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाता है। यह भारतीय लोकतंत्र की आत्मा का उत्सव है। यह वह ऐतिहासिक दिन है जब भारत ने स्वयं को संविधान के माध्यम से परिभाषित किया और एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में विश्व मंच पर अपनी पहचान स्थापित की। इस वर्ष हम 77वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। यह एक ऐसा अवसर है जो हमें हमारे सामूहिक संघर्ष, उपलब्धियों और भविष्य की जिम्मेदारियों की याद दिलाता है।

 

26 जनवरी: इतिहास का स्वर्णिम अध्याय

26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान औपचारिक रूप से लागू हुआ। इसके साथ ही भारत में जनता के शासन की शुरुआत हुई, जहाँ सत्ता का केंद्र कोई शासक नहीं, बल्कि नागरिक बने। लेकिन 26 जनवरी की तिथि केवल संयोग नहीं थी। इसी दिन 1930 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में “पूर्ण स्वराज” का ऐतिहासिक संकल्प लिया था। बीस वर्षों बाद यही सपना संविधान के रूप में साकार हुआ। इसीलिए 26 जनवरी भारत के स्वतंत्रता संग्राम और संवैधानिक व्यवस्था दोनों का सेतु है।

 

भारत का संविधान

भारत का संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। इसे तैयार करने में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के नेतृत्व में बी. एन. राव सहित अन्य संविधान निर्माताओं ने एक ऐसा ढांचा गढ़ा, जो विविधताओं से भरे भारत को एक सूत्र में बाँध सके।

 

स्वतंत्रता संग्राम

गणतंत्र दिवस की जड़ें केवल 1950 में नहीं, बल्कि उस लंबे स्वतंत्रता संग्राम में हैं, जो बलिदानों से सींचा गया। मंगल पांडे की चिंगारी, रानी लक्ष्मीबाई का साहस, भगत सिंह का बलिदान, चंद्रशेखर आज़ाद का स्वाभिमान और महात्मा गांधी का सत्य व अहिंसा का मार्ग—इन सभी ने भारत को केवल आज़ाद ही नहीं किया, बल्कि एक नैतिक राष्ट्र के रूप में खड़ा किया।

 

रीति-रिवाज और उत्सव

26 जनवरी को पूरे देश में इस दिन को विशेष रीति-रिवाजों और गरिमामय उत्सवों के साथ मनाया जाता है। इस दिन सबसे पहले राष्ट्रीय ध्वज का ध्वजारोहण होता है। राष्ट्रपति द्वारा राजधानी दिल्ली में और राज्यों में राज्यपाल व प्रशासनिक प्रमुखों द्वारा ध्वजारोहण किया जाता है। इसके साथ राष्ट्रगान गाया जाता है।

नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड इस पर्व का मुख्य आकर्षण होती है। इसमें सशस्त्र बलों की अनुशासित टुकड़ियाँ, विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झांकियाँ और भारत की सैन्य एवं सामाजिक शक्ति का प्रदर्शन किया जाता है। यह परेड देश की विविधता, सांस्कृतिक विरासत और संगठन क्षमता का जीवंत उत्सव है।

विद्यालयों, महाविद्यालयों और संस्थानों में देशभक्ति कार्यक्रम, भाषण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और पुरस्कार वितरण आयोजित किए जाते हैं। लोग अपने घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर तिरंगा फहराकर इस पर्व को मनाते हैं।

 

आज के संदर्भ में गणतंत्र दिवस का महत्व

आज भारत युवा है, आकांक्षी है और निरंतर आगे बढ़ रहा है। विज्ञान, तकनीक, खेल, चिकित्सा और सेवा; हर क्षेत्र में भारत नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। लेकिन साथ ही, असमानता, संवेदनहीनता और सामाजिक दूरी जैसी चुनौतियाँ भी हमारे सामने हैं। गणतंत्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि समाधान केवल नीतियों में नहीं, बल्कि नागरिक चेतना में है। जब नागरिक जागरूक होते हैं, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है।

 

हमें क्या सिखाता है गणतंत्र दिवस?

गणतंत्र दिवस उत्सव के साथ-साथ आत्मचिंतन और आत्मसुधार का दिन भी है। यह दिन हमें यह सिखाता है कि संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का उपयोग करते हुए, हम अपने कर्तव्यों को कभी न भूलें। समाज के कमजोर वर्गों की सहायता करना, शिक्षा को बढ़ावा देना और समानता के सिद्धांत को अपनाना हमारे कर्तव्यों में शामिल होना चाहिए। गणतंत्र दिवस हमें अपने जीवन को इस तरीके से जीने की प्रेरणा देता है कि हम दूसरों की भलाई में अपना योगदान दें।

77वें गणतंत्र दिवस पर, आइए हम सब मिलकर यह प्रण लें कि हम अपने संविधान के मूल्यों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएंगे।

समाज में समानता, स्वतंत्रता और न्याय का संदेश फैलाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। नारायण सेवा संस्थान की तरह, हम भी जरूरतमंदों की मदद करेंगे और एक बेहतर भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे। यह दिन हमें एक उज्जवल और समानता पर आधारित भविष्य की दिशा में प्रेरित करता है।

जय हिंद!

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