10 March 2024

जानिए, भगवान विष्णु को क्यों कहा जाता है नारायण और हरि?

सनातन परंपरा में भगवान विष्णु को इस जगत का पालनहार माना गया है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु की आराधना से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। साथ ही भगवान विष्णु की पूजा करने से माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद लोगों को स्वतः ही प्राप्त हो जाता है। इस जगत में भगवान विष्णु को विभिन्न नामों से जाना है। जो उनके भक्तों के द्वारा आदरपूर्वक लिए जाते हैं। भक्त अपने आराध्य देव को श्रीहरि, लक्ष्मीपति, नारायण जैसे नामों से पुकारते हैं। 

पुराणों में भगवान विष्णु के दो रूप बताए जाते हैं। एक रूप में उन्हें बेहद  शांत, प्रसन्न और कोमल बताया गया है। जबकि दूसरे रूप में उन्हें भयानक बताया गया है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु का शांत चेहरा लोगों को विपरीत परिस्थियों के समय में शांत रहने की प्रेरणा देता है। उनकी आराधना में गाया जाने वाला यह श्लोक बेहद प्रसिद्ध है-

 

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं

विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ।

लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं

वन्दे विष्णुं भवभ्यहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

 

अर्थात् जिनकी आकृति स्वरूप अतिशय शांत है, जो ‍जगत के आधार व देवताओं के भी ईश्वर है, जो शेषनाग की शैया पर विश्राम किए हुए हैं, जिनकी नाभि में कमल है और जिनका वर्ण श्याम रंग का है, जिनके अतिशय सुंदर रूप का योगीजन ध्यान करते हैं, जो गगन के समान सभी जगहों पर छाए हुए हैं, जो जन्म-मरण के भय का नाश करने वाले हैं, जो सम्पूर्ण लोकों के स्वामी हैं, जिनकी भक्त लोग वंदना करते हैं, ऐसे लक्ष्मीपति कमलनेत्र भगवान श्रीविष्णु को अनेक प्रकार से विनती कर प्रणाम करता हूँ।

 

नारायण नाम का रहस्य 

भगवान विष्णु के नारायण नाम का उल्लेख पौराणिक कथाओं में मिलता है। कहा जाता है कि देवर्षि नारद भगवान विष्णु को नारायण नाम से पुकारते थे। नारायण का संबंध जल से है। भगवान विष्णु बैकुंठ धाम के क्षीर सागर में निवास करते हैं। जल को नीर के नाम से भी जाना जाता है, जिसे पुराने समय की कुछ विशेष स्थितियों में ‘नर’ कहा जाता था। अर्थात ‘नर’ की गहराई में निवास करने वाले भगवान। इस तरह से भगवान विष्णु का नाम नारायण पड़ा। 

 

हरि नाम का रहस्य 

नारायण के अलावा भगवान विष्णु को हरि नाम से भी जाना जाता है। हरि शब्द का जन्म ‘हर’ से हुआ है। ‘हर’ का अर्थ होता है हरने वाला। कई स्थितियों में हरने का अर्थ चुराने वाला भी माना जाता है। भगवान विष्णु का हरि रूप लोगों की समस्याओं को हर लेता है। इसीलिए भगवान विष्णु को हरि भी कहा जाता है। सच्चे मन से भगवान का स्मरण करने वाले भक्तों को कभी निराशा हाथ नहीं लगती। भक्तों के जीवन में कितने भी बड़े कष्ट आ जाएं, भगवान विष्णु सभी कष्टों का हरण कर लेते हैं। कष्टों का हरण करने के कारण ही विष्णु पुराण में कहा गया है, ‘हरि हरति पापणि। जिसका अर्थ है, जीवन के सारे पापों और विलापों को हरने वाले भगवान हरि यानी कि भगवान विष्णु ही हैं।