01 January 2026

षटतिला एकादशी 2026: तिल के प्रयोग से दरिद्रता से ऐसे मिलेगा छुटकारा

Start Chat

सनातन धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी माना गया है। यह तिथि भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होती है, जिनकी कृपा से जीव के समस्त पाप नष्ट होते हैं, जीवन के कष्ट दूर होते हैं और साधक मोक्ष की दिशा में अग्रसर होता है। माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी को आने वाली षटतिला एकादशी विशेष रूप से दान, तप और करुणा का पर्व है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का एक अनुपम अवसर लेकर आ रहा है।

 

षटतिला एकादशी 2026 कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, षटतिला एकादशी तिथि का आरंभ 13 जनवरी 2026 को दोपहर 03 बजकर 17 मिनट से होगा और इसका समापन 14 जनवरी 2026 को शाम 05 बजकर 52 मिनट पर होगा। हिन्दू धर्म में उदयातिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी 2026, बुधवार को रखा जाएगा।

 

षटतिला एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

षटतिला एकादशी का नाम ही इसके विशेष महत्व को प्रकट करता है। ‘षट’ अर्थात छह और ‘तिला’ अर्थात तिल। इस दिन तिल का छह प्रकार से प्रयोग करने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, तिल भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और इसका उपयोग करने से दरिद्रता का नाश, पापों का क्षय तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

पुराणों में वर्णन मिलता है कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखता है, तिल का दान करता है और श्रीहरि का स्मरण करता है, उसके पूर्व जन्मों के दोष भी समाप्त हो जाते हैं। षटतिला एकादशी मन, वचन और कर्म – तीनों स्तरों पर शुद्धि का पर्व है।

 

षटतिला एकादशी पर तिल के छह प्रकार के उपयोग

धर्मग्रंथों में षटतिला एकादशी पर तिल के छह उपयोग बताए गए हैं, जिनका पालन करने से व्रत पूर्ण फलदायी होता है—

  • तिल मिश्रित जल से स्नान – स्नान के जल में काले तिल मिलाकर स्नान करने से शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है।
  • तिल का उबटन लगाना – यह शरीर को पवित्र करता है और नकारात्मकता को दूर करता है।
  • हवन में तिल का प्रयोग – अग्नि में तिल अर्पित करने से देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
  • तिल से तर्पण करना – पितरों को तिलयुक्त जल अर्पित करने से पितृ दोष शांत होता है।
  • भोजन में तिल का सेवन – तिल युक्त भोजन प्रसाद रूप में ग्रहण करना शुभ माना गया है।
  • तिल का दान – अपनी सामर्थ्य के अनुसार तिल का दान करना इस व्रत का प्रमुख अंग है।

 

षटतिला एकादशी पर क्या दान करें?

इस पावन दिन अन्न दान को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। अन्न दान से न केवल भूखे का पेट भरता है, बल्कि दाता के जीवन में भी सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इस शुभ अवसर पर आप नारायण सेवा संस्थान के माध्यम से दीन-दुःखी और निर्धन बच्चों को भोजन कराने के सेवा प्रकल्प में सहयोग करें और पुण्य के भागी बनें।

षटतिला एकादशी त्याग और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करें, व्रत रखें, तिल का प्रयोग करें और जरूरतमंदों की सहायता कर अपने जीवन को सार्थक बनाएं। यह पर्व केवल भौतिक सुख-संपदा ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

यथा दीपो घृतैर्धृतः।

तथा दानं पवित्रं च सफलं च भवेत्॥

अर्थात, जैसे दीपक घी से प्रज्वलित होकर प्रकाश फैलाता है, उसी प्रकार दान से जीवन पवित्र होता है और सफलता प्राप्त होती है।

इस षटतिला एकादशी पर दान और धर्म के प्रकाश से अपने जीवन को आलोकित करें। 

 

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: षटतिला एकादशी 2026 कब है?

उत्तर: साल 2026 में षटतिला एकादशी 14 जनवरी को मनाई जाएगी। 

प्रश्न: षटतिला एकादशी कौन से भगवान के लिए समर्पित है?

उत्तर: षटतिला एकादशी भगवान विष्णु के लिए समर्पित है। 

प्रश्न: षटतिला एकादशी पर किन चीजों का दान करना चाहिए?

उत्तर: षटतिला एकादशी पर जरूरतमंदों को अन्न, तिल, वस्त्र और भोजन का दान करना चाहिए।

 

X
Amount = INR