कहते हैं कि जब उम्मीद की कोई किरण दिखाई नहीं देती, तब ईश्वर किसी न किसी रूप में सहारा बनकर सामने आ जाते हैं। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के एक छोटे से गाँव में रहने वाले राजेश चौहान और उसके परिवार के लिए नारायण सेवा संस्थान ऐसा ही एक सहारा बनकर आया।
राजेश का जन्म समय से पहले हुआ था। जन्म के साथ ही उसके दोनों पैरों के पंजे गंभीर रूप से टेढ़े थे। किसान परिवार में जन्मे राजेश के पिता विनोद चौहान मेहनत-मजदूरी और खेती करके किसी तरह परिवार का गुजारा चलाते थे। बेटे की इस स्थिति ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया था। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने राजेश के इलाज के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन हर जगह से निराशा ही हाथ लगी।
समय बीतता गया। राजेश बड़ा हुआ तो उसके माता-पिता ने उसे स्कूल भेजा। वह चौथी कक्षा तक पढ़ पाया, लेकिन चलने-फिरने में बढ़ती कठिनाइयों और बिगड़ती शारीरिक स्थिति के कारण उसकी पढ़ाई भी बीच में ही छूट गई। एक मासूम बच्चे के सपने धीरे-धीरे उसकी मजबूरियों के बोझ तले दबने लगे।
फिर एक दिन पड़ोसियों के माध्यम से उसके परिवार को नारायण सेवा संस्थान के बारे में जानकारी मिली। 7 मार्च 2022 को राजेश अपने परिजनों के साथ पहली बार उदयपुर स्थित नारायण सेवा संस्थान पहुँचा।
संस्थान के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जाँच के बाद उसे ऑपरेशन की सलाह दी। 10 मार्च 2022 को राजेश के बाएँ पैर का सफल ऑपरेशन किया गया। कुछ ही समय में उसका पैर पहले की अपेक्षा काफी सीधा दिखाई देने लगा। जिससे परिवार की उम्मीदें जाग उठीं। इसके बाद मई 2022 में दाएँ पैर का भी सफल ऑपरेशन किया गया। कई चरणों में उपचार, विजिटिंग और फिजियोथेरेपी के बाद जब राजेश को कैलिपर्स और विशेष जूते पहनाए गए, तो वह क्षण पूरे परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। वर्षों से जो बच्चा अपने पैरों पर ठीक से खड़ा भी नहीं हो पाता था, वह अब अपने कदमों से आगे बढ़ रहा था।
राजेश को चलते देखकर उसके माता-पिता की आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े। यह केवल एक बच्चे का चलना नहीं था, बल्कि एक परिवार के टूटते सपनों का फिर से जीवित हो जाना था। राजेश के चेहरे पर लौटी मुस्कान ने वर्षों के दर्द को मानो पल भर में मिटा दिया।
भावुक होकर पिता विनोद चौहान कहते हैं, “मैं एक गरीब किसान हूँ। बेटे के इलाज की उम्मीद लगभग छोड़ चुका था। नारायण सेवा संस्थान, यहाँ के डॉक्टरों और पूरी टीम ने मेरे बेटे को नया जीवन दिया है। मैं संस्थान का सदैव आभारी रहूँगा।”
आज राजेश अपने पैरों पर खड़ा है, आसानी से चल फिर लेता है और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ रहा है।