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मोहन अब दौड़ेगा,
खेलेगा और स्कूल जाएगा

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मोहन को मिला नया जीवन

मोहन कहते हैं कि नारायण सेवा संस्थान ने उन्हें जिंदगी जीने का एक नया अवसर दिया है। उनकी भी इच्छा थी कि वे स्कूल जाएं, क्रिकेट खेलें और अपनी उम्र के अन्य बच्चों की तरह हँसते-खेलते अपना बचपन जिएं।

लेकिन जन्म से ही दोनों पैरों से दिव्यांग होने के कारण उनके लिए चलना-फिरना बेहद कठिन था। हालात ऐसे थे कि मोहन ने अपने सपनों को मन ही मन दबा लिया था। तभी उनके चाचा उन्हें लेकर नारायण सेवा संस्थान पहुंचे, जहाँ डॉक्टरों द्वारा उनका सफल ऑपरेशन किया गया।

आज मोहन अपने पैरों पर खड़े होकर आत्मविश्वास के साथ जीवन जी रहे हैं। अब वे आसानी से चल-फिर सकते हैं और अपने सपनों को पूरा करने की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

मोहन की यह प्रेरणादायक कहानी आज कई अन्य दिव्यांग बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है। यही कारण है कि वे संस्थान द्वारा आयोजित शिविरों में जाकर बच्चों को हिम्मत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

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