16 July 2025

सावन में इसलिए करें भगवान शिव की आराधना, जानें दान का महत्व

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श्रावण मास… हिन्दू पंचांग का वह पुण्यकाल जब आकाश से अमृत बरसता है, धरती हरियाली से सजी होती है और भक्तों के हृदय में भगवान शिव की आराधना की अग्नि प्रज्वलित होती है। यह महीना केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि आत्मा को ईश्वर की ओर मोड़ देने का वह मार्ग है, जिसमें भक्ति, व्रत, संयम और तप का संगम होता है। श्रद्धालु इस पूरे मास में भोलेनाथ की उपासना करते हैं, जलाभिषेक करते हैं।  इस माह में ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से धरती गुंजायमान रहती है।

 

श्रावण मास का धार्मिक महत्त्व

 

करुणा के सागर हैं महादेव

 

व्रत और नियम

 

जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का महात्म्य

 

कांवड़ यात्रा

 

सावन में दान का महत्व

 

सावन मास में नारायण सेवा संस्थान के दीन-हीन, असहाय दिव्यांग बच्चों को भोजन कराने के सेवा प्रकल्प में सहयोग करें।

 

सावन वह अवसर है जब सृष्टि की सबसे सरल आराधना जिसे भगवान शिव की पूजा कहा जाता है, सबसे प्रभावी रूप लेती है। भोलेनाथ की महिमा अनंत है, और सावन उसका जीवंत उत्सव है। इस मास में की गई साधना जीवन को न केवल धार्मिकता से भर देती है, बल्कि अंतःकरण को भी शुद्ध करती है।

 

तो आइए, इस सावन में शिव नाम का संकीर्तन करें, सेवा करें, संयम रखें और जलाभिषेक के साथ अपनी श्रद्धा को शिव चरणों में समर्पित करें।

 

हर हर महादेव!

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