सनातन धर्म में परमा एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। यह पावन तिथि तीन वर्ष में एक बाद भगवान विष्णु के प्रिय मास पुरुषोत्तम मास में आती है। भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित यह एकादशी भक्ति, तप, सेवा और दान के माध्यम से जीवन को पवित्र एवं मंगलमय बनाने का संदेश देती है।
शास्त्रों के अनुसार ‘परमा‘ का अर्थ है सर्वोत्तम और परम कल्याण प्रदान करने वाली। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा पूर्वक व्रत, पूजा, जप एवं दान करने से व्यक्ति को विशेष पुण्यफल की प्राप्ति होती है तथा जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं। यह एकादशी मन, वचन और कर्म को शुद्ध कर साधक को धर्म एवं मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करती है।
परमा एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माना गया है। इस पावन तिथि पर श्रीहरि की आराधना करने तथा दीन-हीन, असहाय, जरूरतमंद लोगों को दानं देने से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
ऐसा कहा जाता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से इस दिन व्रत एवं दान करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और उन्हें पुण्य की प्राप्ति होती है। परमा एकादशी आत्मशुद्धि, संयम और सेवा भावना को जागृत करने का भी अवसर है।
शास्त्रों में दान और सेवा को सबसे श्रेष्ठ पुण्य कर्म बताया गया है। स्कन्द पुराण में दान का उल्लेख करते हुए कहा गया है-
न्यायोपार्जितवित्तस्य दशमांशेन धीमतः।
कर्तव्यो विनियोगश्च ईश्वरप्रीत्यर्थमेव च॥
अर्थात बुद्धिमान मनुष्य को अपने ईमानदारी से अर्जित धन का एक भाग ईश्वर की प्रसन्नता और जनकल्याण के कार्यों में अवश्य लगाना चाहिए।
परमा एकादशी पर सेवा का पुण्यदायी अवसर
इस पावन परमा एकादशी पर दान देकर दीन-हीन, असहाय, जरूरतमंद, निर्धन एवं दिव्यांग बच्चों की भोजन सेवा में सहयोग करें और भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्त करें। इस शुभ अवसर पर सेवा, भक्ति और दान के माध्यम से अपने जीवन को पुण्यमय एवं सार्थक बनाएं।