पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 14 मार्च को प्रातः 08 बजकर 10 मिनट से होगा तथा इसका समापन 15 मार्च को प्रातः 09 बजकर 16 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार 15 मार्च 2026, रविवार को पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। व्रत का पारण 16 मार्च को द्वादशी तिथि पर किया जाएगा।
पापमोचिनी शब्द दो भागों से मिलकर बना है, पाप और मोचिनी अर्थात पापों से मुक्त करने वाली। यह एकादशी उपवास के साथ साथ आंतरिक शुद्धि का साधन भी है। यह दिन आत्मावलोकन और प्रभु की शरण में समर्पण का अवसर प्रदान करता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो साधक इस दिन भगवान श्रीहरि की आराधना करता है, पूजा आके दौरान उन्हें तुलसी दल अर्पित करता है, भगवान की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करता है और भक्ति भाव से मंत्र-जाप करता है, उसके जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से घर में सुख-समृद्धि, शांति और धर्म का वास होता है। इस दिन किया गया जप-तप और दान अनंत गुना फल प्रदान करता है।
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि घोर तपस्या में लीन थे। उनकी तपस्या से देवलोक विचलित हो उठा। देवराज इंद्र ने अप्सरा मंजुघोषा को उनकी तपस्या भंग करने भेजा। मोह के प्रभाव में आकर ऋषि की साधना भंग हो गई और वे वर्षों तक सांसारिक आकर्षण में उलझे रहे। जब उन्हें अपनी भूल का बोध हुआ, तो वे अत्यंत दुखी हुए और पापों से मुक्ति का उपाय खोजने लगे। तब देवर्षि नारद ने उन्हें पापमोचिनी एकादशी व्रत का रखने का सुझाव दिया। विधिपूर्वक व्रत रखने तथा भगवान नारायण की आराधना से मेधावी ऋषि पुनः तपोबल प्राप्त कर पापों से मुक्त हुए।
पापमोचिनी एकादशी का व्रत दशमी तिथि की रात्रि से ही प्रारंभ करना चाहिए।
सनातन परंपरा में दान को महान तप कहा गया है। कहा जाता हिय कि विशेष रूप से एकादशी के दिन किया गया दान अक्षय फल देने वाला माना गया है। अन्नदान, वस्त्रदान, गौदान या दक्षिणा इन सबका अपनी-अपनी जगह विशेष महत्व है।
स्कंदपुराण में दान का उल्लेख करते हुए कहा गया है
न्यायोपार्जितवित्तस्य दशमांशेन धीमतः।
कर्तव्यो विनियोगश्च ईश्वरप्रीत्यर्थमेव च।।
अर्थात् उचित साधनों द्वारा और श्रेष्ठ बुद्धि बल द्वारा अर्जित की गई संपत्ति में से 10वां भाग अपना कर्त्तव्य मानकर दान में दे देना चाहिए। अपने दान को भगवान की प्रसन्नता के लिए अर्पित करो।
पापमोचिनी एकादशी आत्मशुद्धि और आत्मजागरण का दिव्य पर्व है। इस पावन अवसर पर व्रत, जप, ध्यान और दान का संकल्प लें। भगवान श्रीहरि की आराधना कर अपने जीवन को मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर बनाएं।
प्रश्न: पापमोचिनी एकादशी 2026 कब है?
उत्तर: साल 2026 में पापमोचिनी एकादशी 15 मार्च को मनाई जाएगी।
प्रश्न: पापमोचिनी एकादशी कौन से भगवान के लिए समर्पित है?
उत्तर: पापमोचिनी एकादशी भगवान नारायण के लिए समर्पित है।
प्रश्न : पापमोचिनी एकादशी पर किसकी पूजा करनी चाहिए?
उत्तर: पापमोचिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करना चाहिए।