11 February 2026

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि और शिव-तत्व का महत्व

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सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत पावन, रहस्यमय और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण माना गया है। यह रात्रि देवों के देव भगवान शिव की आराधना को समर्पित है, जिन्हें आदिदेव, महादेव, त्रिनेत्रधारी, नीलकंठ और संहार एवं कल्याण के अधिपति के रूप में पूजा जाता है। शिव का स्वरूप ही साधना है, शिव का नाम ही मुक्ति है और शिव की भक्ति ही जीवन का परम लक्ष्य है।

 

महाशिवरात्रि क्या है? 

महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पावन पर्व है, जो फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। यह ‘शिव की दिव्य रात्रि’ कहलाती है, जिसमें भक्तगण व्रत, रात्रि-जागरण, रुद्राभिषेक एवं भक्ति-भाव से महादेव की आराधना करते हैं। इस रात्रि में उपवास रखने, बेलपत्र, दूध, जल एवं भांग चढ़ाने से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं। यह व्रत पापों का नाश, मनोकामनाओं की पूर्ति एवं मोक्ष प्राप्ति का श्रेष्ठ साधन माना गया है। भक्त इस दिन अज्ञान के अंधकार से मुक्ति पाकर शिवतत्व में लीन होने का संकल्प लेते हैं। महाशिवरात्रि शांति एवं कल्याण की अनुपम रात्रि है।

 

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव सृष्टि के आदि हैं; वे सृजन, पालन और संहार के संतुलनकर्ता हैं। महाशिवरात्रि वह दिव्य रात्रि है, जब शिव-तत्त्व अत्यंत सक्रिय होता है। यह रात्रि आत्मचिंतन, तप, जप और साधना के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। कहा जाता है कि इस रात्रि शिवभक्तों द्वारा की गई आराधना अनेक जन्मों के पापों का नाश कर देती है और साधक को शिव-कृपा का अधिकारी बनाती है।

सोमवार, सावन मास, शिवरात्रि और विशेष रूप से महाशिवरात्रि; ये सभी भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माने गए हैं, किंतु फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है।

 

महाशिवरात्रि 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त 

वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 को सायं 05:34 बजे प्रारंभ होगी और 16 फरवरी 2026 को सायं 06:04 बजे समाप्त होगी। निशीथ काल में पूजा की परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी 2026, रविवार को रखा जाएगा। महाशिवरात्रि की पूजा रात्रि में करना विशेष पुण्यदायी माना गया है

प्रथम शुभ काल: सायं 05:54 बजे से 09:03 बजे तक

द्वितीय शुभ काल: रात्रि 09:03 बजे से 12:12 बजे तक

 

इन कालों में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से साधक की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। व्रत का पारण 16 फरवरी को प्रातः 06:31 बजे से दोपहर 03:03 बजे तक किया जा सकता है। 

 

महाशिवरात्रि की पूजा-विधि

  • महाशिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर अथवा मंदिर में शिवलिंग की स्थापना करें।
  • मिट्टी या तांबे के लोटे से जल या दूध द्वारा शिवलिंग का अभिषेक करें। 
  • बेलपत्र, आक-धतूरा, भस्म, चावल और पुष्प अर्पित करें। 
  • दीप प्रज्वलित कर धूप-दीप से पूजन करें। 

यदि मंदिर जाना संभव न हो, तो घर में ही मिट्टी से शिवलिंग बनाकर श्रद्धापूर्वक पूजन किया जा सकता है। इस दिन शिवपुराण का पाठ, महामृत्युंजय मंत्र तथा पंचाक्षर मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जप विशेष फल प्रदान करता है। रात्रि जागरण कर शिव-नाम स्मरण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

 

चार प्रहरों की पूजा का महत्व

शास्त्रों में बताया गया है कि महाशिवरात्रि की रात्रि चार प्रहरों में विभक्त होती है। भक्त अपनी सुविधा अनुसार किसी भी प्रहर में या चारों प्रहरों में शिव पूजा कर सकते हैं। प्रत्येक प्रहर की पूजा जीवन के विभिन्न दोषों और बंधनों से मुक्ति दिलाने वाली मानी गई है।

 

महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा

महाशिवरात्रि से जुड़ी अनेक कथाएँ प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने हेतु कठोर तपस्या की थी। उनके तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को उनसे विवाह किया; इसी कारण यह तिथि अत्यंत पवित्र मानी गई।

 

शिव भक्ति का संदेश

महाशिवरात्रि में हम यह जान पाते हैं कि भगवान शिव सरल भाव से प्रसन्न हो जाते हैं। वे औघड़ हैं, भोलेनाथ हैं; जो सच्ची श्रद्धा से किए गए छोटे से पूजन से भी कृपा बरसाते हैं। यह पर्व हमें अहंकार त्याग, करुणा, संयम और आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाता है।

 

शिव स्तुति और पंचाक्षर का महत्व

इस पावन अवसर पर शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

 

“ॐ नमः शिवाय” के पंच अक्षर; न, म, शि, वा, य… पंचतत्त्वों का प्रतीक हैं और साधक को शिवतत्त्व से जोड़ते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धा से इस स्तोत्र का पाठ करता है, वह शिवलोक को प्राप्त होकर शिव के सान्निध्य में आनंदित होता है।

 

शिव पंचाक्षर स्त्रोत:- 

 

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:।।

 

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय। 

मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:।।

 

शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय। 

श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:।।

 

वषिष्ठ कुभोदव गौतमाय मुनींद्र देवार्चित शेखराय।

चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै व काराय नम: शिवाय:।।

 

यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकस्ताय सनातनाय। 

दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै य काराय नम: शिवाय:।।

 

पंचाक्षरमिदं पुण्यं य: पठेत शिव सन्निधौ। 

शिवलोकं वाप्नोति शिवेन सह मोदते।।

 

महाशिवरात्रि आत्मा को देवाधिदेव महादेव में विलीन करने की साधना है। यह रात्रि अज्ञान से ज्ञान, अंधकार से प्रकाश और बंधन से मुक्ति की ओर ले जाने वाली है। महाशिवरात्रि 2026 के इस पावन अवसर पर व्रत, जप, ध्यान और भक्ति के माध्यम से भगवान शिव की कृपा प्राप्त करें और अपने जीवन को शिवमय बनाएं।

 

ॐ नमः शिवाय

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