25 November 2023

इसलिए सिर्फ 12 बार ही किया जाता है सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार एक बेहतरीन योगाभ्यास है। जो सूर्योदय के समय किया जाता है। इस योगाभ्यास में भगवान सूर्य की 12 मुद्राओं को नमस्कार किया जाता है। जिसमें हर मुद्रा के दौरान अलग-अलग मित्रों का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार 12 मित्रों के साथ 12 मुद्राओं में भगवान सूर्य को नमस्कार किया जाता है। यह एक लयबद्ध व्यायाम है जो सिर्फ 12 बार ही किया जाता है। यह योगाभ्यास शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से लोगों को प्रभावित करता है। 

 

सूर्य नमस्कार का शारीरिक और मानसिक प्रभाव 

सूर्य नमस्कार एक ऐसा योगाभ्यास है, जिससे पूरे शरीर की कसरत होती है। यह योगाभ्यास पूरे शरीर की मांसपेशियों को प्रभावित करता है। साथ ही हृदय को भी स्वस्थ्य रखता है। शारीरिक प्रभाव के साथ-साथ सूर्य नमस्कार का गहरा मानसिक प्रभाव भी है। इससे लोगों का ध्यान एकाग्र होता है और उनके मन को शांति मिलती है।

सूर्य नमस्कार में 12 मित्रों के साथ 12 मुद्राओं का चुनाव मानसिक सद्भाव की अवधारणा के अनुरूप है। यह योगभ्यास करने वाले लोगों को सतत प्रवाह की स्थिति में प्रवेश करने की अनुमति देता है। जहां मन ध्यान भंग करने वाली चीजों को पार करके खुद को वर्तमान क्षण के साथ जोड़ लेता है। यह योग भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देता है।

 

सूर्य नमस्कार के फायदे 

सूर्य नमस्कार के कई फायदे हैं। जो मानसिक एवं शारीरिक दोनों हो सकते हैं। चिकित्सकों और योग निर्देशकों के अनुसार, सूर्य नमस्कार आपको वजन घटाने में सहायता करता है। साथ ही शरीर की पाचन शक्ति को बढ़ाने में सहायता करता है।

 

इसलिए सिर्फ 12 बार ही किया जाता है सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार 12 मुद्राओं में 12 योगासनों और 12 मंत्रो के साथ किया जाता है। यह योगाभ्यास 12 से अधिक या कम मुद्राओं में नहीं किया जाता। इसके पीछे कई अध्यात्मिक कारण हैं-

  • योग दर्शन में बारह की संख्या आध्यात्मिक विकास के बारह चरणों से जुड़ी होती है। बारह बार किया जाने वाला सूर्य नमस्कार, इन चरणों के माध्यम से एक पवित्र योगाभ्यास बन जाता है जो अभ्यासकर्ताओं को प्रकृति के साथ संबंध स्थापित करने में मदद करता है। कई संस्कृतियों में सूर्य नमस्कार को जीवन शक्ति प्रदान करने वाला माना जाता है। योगाभ्यास की यह आध्यात्मिक प्रतिध्वनि परस्पर जुड़ाव की भावना को बढ़ावा देती है।
  • इसके अलावा दूसरा आध्यात्मिक कारण यह है कि हिन्दू धर्म में 33 कोटि देवी देवता माने जाते हैं। उनमें से द्वादश आदित्यों का स्थान माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य देव को ही द्वादश आदित्य कहा जाता है। इसलिए भगवान सूर्य के 12 रूपों को नमस्कार किया जाता है। इसलिए सूर्य नमस्कार में सूर्य देव को 12 बार नमस्कार किया जाता है।
  • कहा जाता है कि शरीर के 12 अंगों में सूर्य का वास होता है इसलिए सूर्य नमस्कार के दौरान सूर्य देव को 12 बार नमस्कार किया जाता है। इसके अलावा 12 राशियां होती हैं जिसमें सूर्य देव प्रवेश करते हैं। इसलिए सूर्य नमस्कार के दौरान भगवान सूर्य को 12 बार नमस्कार किया जाता है।