14 February 2026

Holika Dahan Muhurat 2026: भद्रा और चंद्र ग्रहण के बीच कब करें होलिका दहन? जानें शुभ मुहूर्त

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फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होलिका दहन भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। यह अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का दिव्य प्रतीक है। इस दिन संध्या समय विधि-विधान से होलिका दहन किया जाता है और भक्तजन अपने जीवन से नकारात्मकता, पाप और अहंकार को दूर करने का संकल्प लेते हैं।

 

होलिका दहन 2026 कब है?

इस वर्ष होली पर्व पर भद्रा एवं खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे होलिका दहन को लेकर दुविधा उत्पन्न हो गई है। ऐसे में पंडितों के मत के अनुसार 3 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा और अगले दिन 4 मार्च को धुलेंडी पर रंगों का त्योहार मनाया जाएगा।

इस बार होली के दिन पड़ने वाला चंद्र ग्रहण खण्डग्रास होगा। यह ग्रहण भारत के अलावा दुनिया के अन्य देशों में भी देखा जा सकेगा। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर होगी। इसका समापन अगले दिन 3 मार्च को शाम 5 बजकर 7 मिनट पर होगा। इसलिए 3 मार्च को होलिका दहन  किया जाएगा। ग्रहण के उपरांत शाम 6 बजकर 25 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक होलिका दहन किया जा सकेगा।

 

पौराणिक कथा

होलिका दहन की कथा का वर्णन श्रीमद् भागवत और अन्य पुराणों में मिलता है। हिरण्यकशिपु नामक अत्याचारी असुरराज ने स्वयं को भगवान घोषित कर दिया था। उसका पुत्र भक्त प्रह्लाद भगवान श्रीहरि विष्णु का परम भक्त था। यह बात हिरण्यकशिपु को स्वीकार नहीं थी। उसने कई बार प्रह्लाद को मृत्यु के मुख में धकेलने का प्रयास किया, किंतु हर बार भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे।

अंततः हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका (जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था) से प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने को कहा। लेकिन भगवान के कृपा आगे होलिका को प्राप्त वरदान निष्फल हो गया। होलिका अग्नि में भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बाहर निकल आए। यही घटना होलिका दहन के रूप में आज भी मनाई जाती है।

 

होलिका दहन का धार्मिक महत्व

होलिका दहन को पापों के दहन और नव जीवन के आरंभ का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि हमारे भीतर जो भी नकारात्मक भाव जैसे क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, अहंकार आदि हैं, उन्हें इस अग्नि में समर्पित कर देना चाहिए। अग्नि देवता को साक्षी मानकर जब हम होलिका की परिक्रमा करते हैं, तो यह हमारे आत्मशुद्धि का संकल्प होता है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोग सूखी लकड़ियाँ और उपले अग्नि में अर्पित करते हैं। जो प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और समृद्धि की प्रार्थना का प्रतीक है।

 

पूजन विधि

होलिका दहन स्थल को शुद्ध करके वहाँ लकड़ियों या उपलों का ढेर सजायें। रोली, अक्षत, पुष्प, जल, गुड़, हल्दी, मूंग, गेहूं की बालियाँ आदि से पूजन करें। कच्चा सूत (मौली) होलिका के चारों ओर लपेटे। भक्तजन श्रद्धा से परिक्रमा करते हुए सुख-समृद्धि और संतानों की रक्षा हेतु कामना करें। होलिका की अग्नि की राख को माथे पर लगाएं। इससे नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।

 

सांस्कृतिक महत्व

होलिका दहन धार्मिक त्यौहार के साथ ही सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इस दिन लोग अपने मतभेद भुलाकर एक साथ एकत्रित होते हैं। गाँवों और मोहल्लों में सामूहिक रूप से होलिका दहन किया जाता है, जिससे भाईचारा और एकता की भावना प्रबल होती है। यह पर्व हमें बताता है कि अहंकार का अंत निश्चित है। हिरण्यकशिपु का अभिमान नष्ट हुआ और अंततः भगवान श्रीनृसिंह ने उसका वध कर धर्म की स्थापना की। होलिका दहन हमें सदैव विनम्रता, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

होलिका दहन की ज्वाला केवल बाहर की लकड़ियों को नहीं जलाती, बल्कि हमारे भीतर के अज्ञान को भी भस्म करने का संकेत देती है। यदि हम इस पर्व को आत्ममंथन का अवसर समझें, तो इसका वास्तविक लाभ प्राप्त होगा।

होलिका दहन भारतीय संस्कृति का एक दिव्य उत्सव है, जो हमें यह संदेश देता है कि धर्म की विजय निश्चित है और ईश्वर अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं। यह पर्व हमें आत्मशुद्धि, सकारात्मकता और समाज में प्रेम-एकता स्थापित करने का संदेश देता है। आइए, इस फाल्गुन पूर्णिमा पर हम भी अपने जीवन की नकारात्मकताओं को होलिका की अग्नि में समर्पित करें और प्रह्लाद की भक्ति को हृदय में स्थान दें।

 

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: होलिका दहन 2026 कब है?
उत्तर: होलिका दहन 2 मार्च 2026 (सोमवार) की शाम/रात को किया जाएगा, क्योंकि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण पड़ रहा है।

प्रश्न: होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?
उत्तर: द्रिक पंचांग के अनुसार: 2 मार्च 2026 को शाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक (प्रदोष काल में)। कुछ स्रोतों में रात 12:50 से 2:02 बजे तक (भद्रा से बचाव के लिए) भी उल्लेख है। ग्रहण प्रभाव से बचने के लिए 2 मार्च की रात को प्राथमिकता दी जा रही है।

प्रश्न: 2026 में होली पर चंद्र ग्रहण कब लगेगा?
उत्तर: चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को लगेगा, जो फाल्गुन पूर्णिमा पर है। भारत में शाम 6:26 बजे से 6:47 बजे तक मुख्य रूप से दिखेगा (कुल अवधि दोपहर 3:20 से शाम 6:47 तक)। यह खग्रास (पूर्ण) चंद्र ग्रहण है।

प्रश्न: ग्रहण के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?
उत्तर: पूजा, हवन, भोजन बनाना, नया कार्य शुरू करना वर्जित है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर शुद्धि करें।

प्रश्न: क्या ग्रहण भारत में दिखेगा?
उत्तर: हाँ, भारत सहित एशिया के कई हिस्सों में दिखेगा। शाम को चंद्रोदय के साथ मुख्य भाग नजर आएगा।

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