उत्तर प्रदेश के बदायूँ का रहने वाला रवि एक नन्हा, मासूम बच्चा है। जिसकी आँखों में आसमान जितने बड़े सपने बसे थे। वह भी अपने दोस्तों की तरह दौड़ना, खेलना और स्कूल जाना चाहता था, लेकिन जन्म से ही उसकी जिंदगी आसान नहीं थी। उसके पैर मुड़े हुए थे। इस दिव्यांगता ने उसके छोटे-छोटे सपनों को मानो जकड़ लिया था।
रवि के पिता मजदूरी करते हैं, और परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वे किसी महंगे अस्पताल में उसका इलाज करवा सकें। समय बीतता गया, रवि के सपने वहीं ठहरे रहे। तभी एक दिन उम्मीद की किरण जगी, जब उसके माता-पिता ने टीवी पर नारायण सेवा संस्थान के बारे में देखा।
बिना देर किए वे रवि को लेकर संस्थान पहुंचे। यहाँ अनुभवी चिकित्सकों की टीम ने उसकी स्थिति को समझा और उपचार शुरू किया। एक साल के लंबे अंतराल में एक-एक कर उसके पाँच सफल ऑपरेशन किए गए।
आज वही रवि अपने पैरों पर खड़ा होता है, आत्मविश्वास से चलता है और दोस्तों के साथ क्रिकेट भी खेलता है। उसके चेहरे की मुस्कान अब उसकी जीत की कहानी बयां करती है।
रवि की कहानी विश्वास और नए जीवन की है, जहाँ उसके सपनों को अब उड़ान मिल चुकी है। अब शशांक अग्रसर है अब अपने सपनों को साकार करने के लिए…