04 February 2026

आमलकी एकादशी 2026: इस तरह से प्राप्त करें भगवान विष्णु का आशीर्वाद

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सनातन संस्कृति में एकादशी व्रत को आत्मशुद्धि, भक्ति और मोक्ष का श्रेष्ठ साधन माना गया है। प्रत्येक मास में आने वाली शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी न केवल उपवास का विधान है, बल्कि यह इंद्रियों पर संयम, मन की स्थिरता और भगवान के प्रति समर्पण का भी प्रतीक है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है, जो विशेष रूप से भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष को समर्पित है। यह एकादशी भक्तों के जीवन में सौभाग्य, आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति का द्वार खोलती है।

 

आमलकी एकादशी 2026 कब है?

वर्ष 2026 में आमलकी एकादशी 27 फरवरी को आएगी। पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी को दोपहर 12:33 बजे से प्रारंभ होकर उसी दिन रात्रि 10:32 बजे तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी को ही रखा जाएगा।

व्रत का पारण 28 फरवरी को प्रातः 6:54 बजे से 9:16 बजे के बीच करना श्रेष्ठ माना गया है।

 

आमलकी एकादशी का पौराणिक महत्व

पद्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में आमलकी एकादशी की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में विधिश्रवा नामक एक धर्मपरायण राजा थे, जो भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। उनके राज्य में सभी प्रजा आमलकी एकादशी का श्रद्धापूर्वक व्रत रखती थी। एक बार एक शिकारी अनजाने में इस व्रत का पालन कर बैठा। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से अगले जन्म में वही शिकारी राजा विदूरथ के रूप में जन्मा और एक महान, न्यायप्रिय एवं परोपकारी शासक बना।

इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि आमलकी एकादशी का व्रत अनजाने में भी किया जाए, तो वह व्यक्ति को पुण्य और मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।

 

आंवले के वृक्ष की पूजा 

आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन भगवान विष्णु स्वयं आंवले के वृक्ष में वास करते हैं। आंवला केवल एक औषधीय फल ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश सहित समस्त देवी-देवताओं का निवास होता है।

आयुर्वेद में आंवले को “अमृत फल” कहा गया है, जो शरीर को आरोग्य, ओज और तेज प्रदान करता है। इसकी छाया में बैठकर जप, ध्यान और भजन करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की वृद्धि होती है। इसलिए आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

 

आमलकी एकादशी की पूजा विधि

आमलकी एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। श्रीहरि को चंदन, अक्षत, पीले पुष्प, तुलसी दल और आंवला अर्पित करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें और विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का श्रवण करें।

इसके पश्चात आंवले के वृक्ष की पूजा करें। वृक्ष पर जल अर्पित करें, धूप–दीप प्रज्वलित करें, कलावा और हल्दी अर्पित करें तथा परिक्रमा करें। सायंकाल लक्ष्मी–नारायण की पूजा कर भजन–कीर्तन करें और रात्रि में जागरण करें। अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक व्रत का पारण करें।

 

दान की महिमा

सनातन धर्म में दान को मोक्ष प्राप्ति का साधन बताया गया है। आमलकी एकादशी जैसे पावन पर्व पर किया गया दान कई गुना फल देने वाला माना जाता है। इस दिन अन्नदान, वस्त्रदान और जरूरतमंदों की सेवा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

 

श्रीमद् भगवत गीता में सात्त्विक दान का उल्लेख करते हुए कहा गया है-

 

दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे।

देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्॥

 

अर्थात जो दान बिना किसी स्वार्थ के, उचित समय और योग्य पात्र को दिया जाता है, वही सात्त्विक दान कहलाता है।

 

आमलकी एकादशी केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि यह प्रकृति, शरीर और आत्मा के संतुलन का संदेश भी देता है। आंवले के वृक्ष की पूजा हमें प्रकृति के संरक्षण और उसके प्रति कृतज्ञता का भाव सिखाती है। इस पावन तिथि पर व्रत, पूजा और दान के माध्यम से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कर जीवन को सुख, समृद्धि और मोक्ष की ओर अग्रसर किया जा सकता है।

 

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: आमलकी एकादशी 2026 कब है?
उत्तर: साल 2026 में आमलकी एकादशी 27 फरवरी को मनाई जाएगी।

प्रश्न: आमलकी एकादशी कौन से भगवान के लिए समर्पित है?
उत्तर: आमलकी एकादशी भगवान विष्णु के लिए समर्पित है।

प्रश्न : आमलकी एकादशी पर किसकी पूजा करनी चाहिए?
उत्तर: आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष के नीचे पेड़ की तथा भगवान विष्णु की पूजा करना चाहिए।

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