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शारदीय नवरात्रि सनातन धर्म का अत्यंत पावन और पुण्यदायी पर्व है, जो जगत जननी माँ दुर्गा को समर्पित है। यह नौ दिवसीय उत्सव भक्ति, साधना, उपवास, पूजन, सेवा और दान का दिव्य अवसर होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पावन काल में श्रद्धा और समर्पण से किया गया हर सत्कर्म अनेक गुना पुण्य फल प्रदान करता है।
धर्मग्रंथों में नवरात्रि को शक्ति साधना और सेवा का सर्वोत्तम समय बताया गया है। इस दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनका आदर, पूजन और सत्कार किया जाता है। इसी पावन भाव के साथ नारायण सेवा संस्थान दिव्यांग कन्याओं को न केवल माता रानी का स्वरूप मानकर पूजन करने जा रहा है बल्कि संस्थान ने उनके उपचार (ऑपरेशन) के माध्यम से उन्हें स्वस्थ और सकलांग जीवन प्रदान करने का संकल्प भी लिया है।
महापर्व का महत्व शारदीय नवरात्रि माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का दिव्य अवसर है। इस दौरान भक्त दुर्गा सप्तशती का पाठ, व्रत, जप और विधिवत पूजा करते हैं। साथ ही यह पर्व सेवा और परोपकार के माध्यम से माँ की कृपा पाने का श्रेष्ठ समय माना गया है। दिव्यांग कन्याओं की सेवा, उनका उपचार और पूजन—यह सब माँ की सच्ची आराधना का स्वरूप है।
दान-पुण्य का दिव्य फल शास्त्रों में कहा गया है कि नवरात्रि में कन्याओं की सेवा और पूजन अत्यंत पुण्यदायी होता है। विशेष रूप से जरूरतमंद और दिव्यांग कन्याओं की सहायता करना माँ दुर्गा की सच्ची उपासना के समान माना गया है। मनुस्मृति में कहा गया है-
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है।
आपके दान से बदलेगा जीवन आपके सहयोग से शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर 501 दिव्यांग कन्याओं का निःशुल्क ऑपरेशन कर उन्हें एक स्वस्थ, सक्षम और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान किया जाएगा। साथ ही उन्हें माँ दुर्गा का स्वरूप मानकर विधिपूर्वक पूजन भी किया जाएगा।
इस शारदीय नवरात्रि, नारायण सेवा संस्थान दिव्यांग कन्याओं के उपचार एवं कन्या पूजन का विशेष सेवा प्रकल्प चला रहा है। आप भी इस पुण्यदायी सेवायज्ञ में सहभागी बनें और अपने सहयोग से किसी दिव्यांग कन्या के जीवन में नई आशा, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य का प्रकाश भरें।
शारदीय नवरात्रि में सेवा, दान और कन्या पूजन कर माँ दुर्गा की कृपा और अक्षय पुण्य प्राप्त करें।
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