सनातन संस्कृति में मकर संक्रांति को दान-पुण्य का महापर्व माना गया है। यह पर्व सूर्यदेव के उत्तरायण होने का प्रतीक है। शास्त्रों में उत्तरायण काल को देवताओं का समय कहा गया है, इसलिए इस अवधि में किए गए पुण्य कर्म अक्षय फल प्रदान करते हैं। मकर संक्रांति का दिन आत्म-शुद्धि, करुणा और सेवा भाव को जाग्रत करने का श्रेष्ठ अवसर है। इस पावन तिथि पर सूर्यदेव की उपासना, स्नान, जप-तप और दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
मरीजों को भोजन
महाप्रसाद वितरण
सुधारात्मक
सर्जरी
कैलिपर्स का
वितरण
नारायण लिंब (कृत्रिम अंग)
वितरण
शास्त्रों में कहा गया है कि अन्नदान महादान है। मकर संक्रांति के दिन किया गया दान कई गुना फल देता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया छोटा-सा दान भी व्यक्ति के कर्मों को शुद्ध कर उसे पुण्य और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है। विशेष रूप से तिल और गुड़ से बना भोजन दान करने से जीवन में शांति और समृद्धि का संचार होता है। सनातन परंपरा में इस पावन दिन पर अन्नदान को सर्वोत्तम सेवा माना गया है, क्योंकि भूखे को भोजन कराना स्वयं नारायण की सेवा के समान है।
मकर संक्रांति के इस पुण्यदायी अवसर पर नारायण सेवा संस्थान द्वारा दीन-दुखियों, निर्धन और दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष अन्नसेवा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लगभग पाँच हजार बच्चों को मीठा और स्वादिष्ट भोजन कराया जाएगा। इस पावन पर्व पर आप भी अपने परिवार की ओर से अन्नदान के इस सेवा प्रकल्प में सहभागी बनकर पुण्य के भागी बनें।